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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 1st Apr 2023

    ज़िंदगी भी मुहाल है!

    मिरे दिल जिगर में समा भी जा रहे क्यों नज़र का भी फ़ासला, कि तिरे बग़ैर तो जान-ए-जाँ मुझे ज़िंदगी भी मुहाल है| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 1st Apr 2023

    सुब्ह तेरा ख़याल है!

    तिरे हुस्न पर है मिरी नज़र मुझे सुब्ह शाम की क्या ख़बर, मिरी शाम है तिरी जुस्तुजू मेरी सुब्ह तेरा ख़याल है| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 1st Apr 2023

    कब ये मजाल है!

    मिरी हर ख़ुशी तिरे दम से है मिरी ज़िंदगी तिरे ग़म से है, तिरे दर्द से रहे बे-ख़बर मिरे दिल की कब ये मजाल है| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 1st Apr 2023

    ज़िंदगी का सवाल है!

    तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा तिरे सामने मिरा हाल है, तिरी इक निगाह की बात है मिरी ज़िंदगी का सवाल है| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 1st Apr 2023

    प्रार्थना की कड़ी!

    लंबे समय के बाद आज एक बार फिर से मैं साहित्य की सभी विधाओं में अपना योगदान करने वाले विख्यात कवि और ‘धर्मयुग’ के यशस्वी संपादक स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| भारती जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती…

  • 31st Mar 2023

    वफ़ा साथ लिए जा!

    शामिल है मिरा ख़ून-ए-जिगर तेरी हिना में, ये कम हो तो अब ख़ून-ए-वफ़ा साथ लिए जा| साहिर लुधियानवी

  • 31st Mar 2023

    घटा साथ लिए जा!

    तपती हुई राहों से तुझे आँच न पहुँचे, दीवानों के अश्कों की घटा साथ लिए जा| साहिर लुधियानवी

  • 31st Mar 2023

    जो तुझे सौंप दिया था!

    इक दिल था जो पहले ही तुझे सौंप दिया था, ये जान भी ऐ जान-ए-अदा साथ लिए जा| साहिर लुधियानवी

  • 31st Mar 2023

    दुआ साथ लिए जा!

    बरबाद-ए-मोहब्बत की दुआ साथ लिए जा, टूटा हुआ इक़रार-ए-वफ़ा साथ लिए जा| साहिर लुधियानवी

  • 31st Mar 2023

    बहुत जी लिया मैंने!

    बस अब तो दामन-ए-दिल छोड़ दो बेकार उम्मीदो, बहुत दुख सह लिए मैंने, बहुत दिन जी लिया मैंने| साहिर लुधियानवी

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