-
वही चारा है इन दिनों!
दिल को ग़म-ए-हयात गवारा है इन दिनों, पहले जो दर्द था वही चारा है इन दिनों| क़तील शिफ़ाई
-
यह मधुमय देश हमारा!
आज मैं छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय जयशंकर प्रसाद जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| प्रसाद जी की कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय जयशंकर प्रसाद जी की यह कविता – अरुण यह मधुमय देश हमारा।जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।। सरल…
-
वसंत श्री!
आज मैं छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| उनकी कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की वसंत ऋतु पर लिखी यह कविता – उस फैली हरियाली में,कौन अकेली खेल रही मा!वह अपनी वय-बाली में?सजा…
-
‘फ़राज़’ तुम भी अगर
तवाफ़-ए-मंज़िल-ए-जानाँ हमें भी करना है, ‘फ़राज़’ तुम भी अगर थोड़ी दूर साथ चलो| अहमद फ़राज़