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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 11th Jul 2023

    बस इक बूँद गिरा दी!

    हाए ये उनका तर्ज़-ए-मोहब्बत, आँख से बस इक बूँद गिरा दी| कैफ़ भोपाली

  • 11th Jul 2023

    तिरी तस्वीर लगा दी!

    एक कमी थी ताज-महल में, मैंने तिरी तस्वीर लगा दी| कैफ़ भोपाली

  • 11th Jul 2023

    चुपके चुपके दुआ दी!

    झूम के जब रिंदों ने पिला दी, शैख़ ने चुपके चुपके दुआ दी| कैफ़ भोपाली

  • 11th Jul 2023

    वक़्त का मारा लगता है

    ‘कैफ़’ वो कल का ‘कैफ़’ कहाँ है आज मियाँ, ये तो कोई वक़्त का मारा लगता है| कैफ़ भोपाली

  • 11th Jul 2023

    फूल कँवारा लगता है!

    तितली चमन में फूल से लिपटी रहती है, फिर भी चमन में फूल कँवारा लगता है| कैफ़ भोपाली

  • 11th Jul 2023

    इतना बेचारा लगता है!

    किसको ख़बर ये कितनी क़यामत ढाता है, ये लड़का जो इतना बेचारा लगता है| कैफ़ भोपाली

  • 11th Jul 2023

    कौन हमारा लगता है!

    रात हमारे साथ तू जागा करता है, चाँद बता तू कौन हमारा लगता है| कैफ़ भोपाली

  • 11th Jul 2023

    इमली मीठी लगती है!

    तुमसे मिल कर इमली मीठी लगती है, तुमसे बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है| कैफ़ भोपाली

  • 11th Jul 2023

    कितना प्यारा लगता है!

    तेरा चेहरा सुब्ह का तारा लगता है, सुब्ह का तारा कितना प्यारा लग!ता है| कैफ़ भोपाली

  • 11th Jul 2023

    इनको चूमो!

    आज मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| सुमन जी को साहित्य अकादमी पुरस्कार, भारत भारती पुरस्कार आदि अनेक सम्मान प्राप्त हुए थे| सुमन जी की कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|    लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ जी…

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