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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Jul 2023

    शक्ल तो दिखा गया!

    दयार-ए-दिल की रात में चराग़ सा जला गया, मिला नहीं तो क्या हुआ वो शक्ल तो दिखा गया| नासिर काज़मी

  • 13th Jul 2023

    माँ!

    आज एक बार फिर से मैं अज्ञेय जी द्वारा संपादित ‘दूसरा सप्तक’ के एक महत्वपूर्ण हिन्दी कवि स्वर्गीय नरेश मेहता जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| नरेश मेहता जी की कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|    लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नरेश मेहता जी की यह कविता – मैं नहीं…

  • 12th Jul 2023

    ऐसा गीत क्यूँ गाया!

    हम जिसे गुनगुना नहीं सकते, वक़्त ने ऐसा गीत क्यूँ गाया|    जावेद अख़्तर

  • 12th Jul 2023

    दिल ने इक तमन्ना की!

    आज फिर दिल ने इक तमन्ना की, आज फिर दिल को हमने समझाया| जावेद अख़्तर

  • 12th Jul 2023

    तुम घना साया!

    तुमको देखा तो ये ख़याल आया, ज़िंदगी धूप तुम घना साया| जावेद अख़्तर

  • 12th Jul 2023

    कोई हिला भी नहीं!

    वो चीख़ उभरी बड़ी देर गूँजी डूब गई, हर एक सुनता था लेकिन कोई हिला भी नहीं| जावेद अख़्तर

  • 12th Jul 2023

    अब गिला भी नहीं!

    कभी जो तल्ख़-कलामी थी वो भी ख़त्म हुई, कभी गिला था हमें उनसे अब गिला भी नहीं| जावेद अख़्तर

  • 12th Jul 2023

    कभी मिला भी नहीं!

    कभी तो बात की उसने कभी रहा ख़ामोश, कभी तो हँस के मिला और कभी मिला भी नहीं| जावेद अख़्तर

  • 12th Jul 2023

    कुछ हुआ भी नहीं!

    कभी ये लगता है अब ख़त्म हो गया सब कुछ, कभी ये लगता है अब तक तो कुछ हुआ भी नहीं| जावेद अख़्तर

  • 12th Jul 2023

    मिरा ख़ुदा भी नहीं!

    मैं कब से कितना हूँ तन्हा तुझे पता भी नहीं, तिरा तो कोई ख़ुदा है मिरा ख़ुदा भी नहीं| जावेद अख़्तर

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