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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 8th Sep 2023

    ज़ेहन ग़म की धूप में था

    जागता ज़ेहन ग़म की धूप में था, छाँव पाते ही सो गया जैसे| जावेद अख़्तर

  • 8th Sep 2023

    दीवार धो गया जैसे!

    दाग़ बाक़ी नहीं कि नक़्श कहूँ, कोई दीवार धो गया जैसे| जावेद अख़्तर

  • 8th Sep 2023

    रोशनी के लिए!

    आज एक बार फिर से मैं हिन्दी नवगीत के शिखर पुरूष स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी के कुछ नवगीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं| लीजिए आज प्रस्तुत कर रहा हूँ स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का यह नवगीत –  यों अँधेरा अभी पी रहा हूँ,        रोशनी…

  • 7th Sep 2023

    पत्थर का हो गया जैसे!

    दिल का हर दर्द खो गया जैसे, मैं तो पत्थर का हो गया जैसे| जावेद अख़्तर

  • 7th Sep 2023

    और बेहतर देखिए!

    अक़्ल ये कहती दुनिया मिलती है बाज़ार में, दिल मगर ये कहता है कुछ और बेहतर देखिए| जावेद अख़्तर

  • 7th Sep 2023

    अंदर कि बाहर देखिए!

    ज़ेहन-ए-इंसानी इधर ‘आफ़ाक़ की वुसअत’* उधर, एक मंज़र है यहाँ अंदर कि बाहर देखिए| *दुनिया का फैलाव जावेद अख़्तर

  • 7th Sep 2023

    अब मैं कोई और हूँ!

    छोड़ कर जिस को गए थे आप कोई और था, अब मैं कोई और हूँ वापस तो आकर देखिए| जावेद अख़्तर

  • 7th Sep 2023

    पानी के अंदर देखिए!

    पुर-सुकूँ लगती है कितनी झील के पानी पे बत, पैरों की बे-ताबियाँ पानी के अंदर देखिए| *बतख जावेद अख़्तर

  • 7th Sep 2023

    कल जहाँ दीवार थी!

    कल जहाँ दीवार थी है आज इक दर देखिए, क्या समाई थी भला दीवाने के सर देखिए| जावेद अख़्तर

  • 7th Sep 2023

    आँखों में रेत प्यास!

    आज मैं अपने एक अग्रज और हिन्दी नवगीत को प्रतिष्ठा दिलाने में एक अग्रणी भूमिका निभाने वाले स्वर्गीय देवेन्द्र शर्मा इन्द्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| स्वर्गीय इन्द्र जी से मुझे बहुत स्नेह प्राप्त हुआ था और मैं सामान्यतः जो मेरे अधिक निकट रहे हैं उनकी रचनाएं शेयर नहीं करता हूँ| लीजिए…

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