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इश्क़ ने सारे सलीक़े!
इश्क़ ने सारे सलीक़े बख़्शे, हुस्न से कस्ब-ए-हुनर* क्या करते| *हुनर सीखना परवीन शाकिर
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कोई नहीं सुनता!
आज एक बार फिर मैं प्रसिद्ध आधुनिक हिन्दी कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| अशोक वाजपेयी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता – कोई नहीं सुनता पुकार–सुनती है कान खड़े करसीढियों पर चौकन्नी खड़ी…
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सितारे नहीं मिल पाए!
जब सितारे ही नहीं मिल पाए, ले के हम शम्स-ओ-क़मर* क्या करते| *चाँद और सूरज परवीन शाकिर