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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Sep 2023

    जाने क्या निकले!

    मैं तुझ से मिलता तो तफ़्सील में नहीं जाता, मिरी तरफ़ से तिरे दिल में जाने क्या निकले| वसीम बरेलवी

  • 18th Sep 2023

    किताब-ए-माज़ी के!

    किताब-ए-माज़ी के औराक़ उलट के देख ज़रा, न जाने कौन सा सफ़हा मुड़ा हुआ निकले| वसीम बरेलवी

  • 18th Sep 2023

    मैं चाहता भी यही था!

    उसे समझने का कोई तो रास्ता निकले, मैं चाहता भी यही था वो बेवफ़ा निकले| वसीम बरेलवी

  • 18th Sep 2023

    इश्क़ ने सारे सलीक़े!

    इश्क़ ने सारे सलीक़े बख़्शे, हुस्न से कस्ब-ए-हुनर* क्या करते|  *हुनर सीखना परवीन शाकिर

  • 18th Sep 2023

    दिल में अब हम तिरे!

    राय पहले से बना ली तूने, दिल में अब हम तिरे घर क्या करते| परवीन शाकिर

  • 18th Sep 2023

    कर के ज़र्रे को!

    ख़ाक ही अव्वल ओ आख़िर ठहरी, कर के ज़र्रे को गुहर क्या करते| परवीन शाकिर

  • 18th Sep 2023

    कोई नहीं सुनता!

    आज एक बार फिर मैं प्रसिद्ध आधुनिक हिन्दी कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| अशोक वाजपेयी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता –  कोई नहीं सुनता पुकार–सुनती है कान खड़े करसीढियों पर चौकन्नी खड़ी…

  • 17th Sep 2023

    शजर क्या करते!

    वो मुसाफ़िर ही खुली धूप का था, साए फैला के शजर* क्या करते| *Trees परवीन शाकिर

  • 17th Sep 2023

    सितारे नहीं मिल पाए!

    जब सितारे ही नहीं मिल पाए, ले के हम शम्स-ओ-क़मर* क्या करते| *चाँद और सूरज परवीन शाकिर

  • 17th Sep 2023

    मसरूफ़ियतें जानते हैं!

    तेरी मसरूफ़ियतें जानते हैं, अपने आने की ख़बर क्या करते| परवीन शाकिर

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