-
तहज़ीब में क़बा ही नहीं!
हमारे अहद की तहज़ीब में क़बा ही नहीं, अगर क़बा हो तो बंद-ए-क़बा की बात करें| *गाउन जैसा ढीला वस्त्र साहिर लुधियानवी
-
मुद्दआ की बात करें!
उन्हें पता भी चले और वो ख़फ़ा भी न हों, इस एहतियात से क्या मुद्दआ की बात करें| साहिर लुधियानवी
-
वो ख़ुदा की बात करें!
सज़ा का हाल सुनाएँ जज़ा* की बात करें, ख़ुदा मिला हो जिन्हें वो ख़ुदा की बात करें| *कर्मफल साहिर लुधियानवी
-
पास आओ तो कोई बात बने!
नफ़रतों के जहान में हम को प्यार की बस्तियाँ बसानी हैं, दूर रहना कोई कमाल नहीं पास आओ तो कोई बात बने| साहिर लुधियानवी
-
जो भी है आदमी से कमतर है!
रंग और नस्ल ज़ात और मज़हब जो भी है आदमी से कमतर है, इस हक़ीक़त को तुम भी मेरी तरह मान जाओ तो कोई बात बने| साहिर लुधियानवी
-
हमको यूं ही प्यासा छोड़!
आज एक बार फिर मैं अपने ज़माने में काव्य मंचों के एक लोकप्रिय कवि/शायर रहे स्वर्गीय से बेकल उत्साही जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| बेकल जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बेकल उत्साही जी की यह ग़ज़ल – हम को यूँ ही…
-
छीन पाओ तो कोई बात बने!
ज़िंदगी भीक में नहीं मिलती ज़िंदगी बढ़ के छीनी जाती है, अपना हक़ संग-दिल ज़माने से छीन पाओ तो कोई बात बने| साहिर लुधियानवी
-
सर उठाओ तो कोई बात बने!
पोंछ कर अश्क अपनी आँखों से मुस्कुराओ तो कोई बात बने, सर झुकाने से कुछ नहीं होता सर उठाओ तो कोई बात बने| साहिर लुधियानवी