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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 4th Jun 2024

    हम ओस के मोती हैं!

    कह देना समुंदर से हम ओस के मोती हैं, दरिया की तरह तुझ से मिलने नहीं आएँगे| बशीर बद्र 

  • 4th Jun 2024

    आँसू नहीं आएँगे!

    ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को सिखाएँगे, रोएँगे बहुत लेकिन आँसू नहीं आएँगे| बशीर बद्र 

  • 4th Jun 2024

    वर्त्तमान का निमन्त्रण!

    आज एक बार फिर से मैं ओज और शृंगार दोनों धाराओं में अनेक अमर रचनाएं देने वाले देश के राष्ट्रकवि स्वर्गीय रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| दिनकर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की यह कविता…

  • 3rd Jun 2024

    कौन है किस जगह!

    उम्र करने को है पचास को पार, कौन है किस जगह पता रखना|    निदा फ़ाज़ली

  • 3rd Jun 2024

    मिलने-जुलने का!

    मिलना-जुलना जहाँ ज़रूरी है, मिलने-जुलने का हौसला रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 3rd Jun 2024

    तन्हाइयाँ बचा रखना!

    जिस्म में फैलने लगा है शहर, अपनी तन्हाइयाँ बचा रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 3rd Jun 2024

    अपने घर में कहीं ख़ुदा

    मस्जिदें हैं नमाज़ियों के लिए, अपने घर में कहीं ख़ुदा रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 3rd Jun 2024

    उस में रोने की कुछ!

    घर की ता‘मीर चाहे जैसी हो, उस में रोने की कुछ जगह रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 3rd Jun 2024

    जाने वालों से राब्ता!

    जाने वालों से राब्ता रखना, दोस्तो रस्म-ए-फ़ातिहा रखना| निदा फ़ाज़ली

  • 3rd Jun 2024

    ज़मीं की धूल भी!

    चमकते चाँद-सितारों का क्या भरोसा है, ज़मीं की धूल भी अपनी उड़ान में रखना| निदा फ़ाज़ली

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