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क्यों उसको जीवन भार न हो!
आज एक बार फिर से मैं हिन्दी गीतों के राजकुंवर कहलाने वाले स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी ने हिन्दी साहित्य और हिन्दी फिल्मों को कुछ अमूल्य गीत दिए हैं| नीरज जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय…
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वो धूप के छप्पर हों!
वो धूप के छप्पर हों या छाँव की दीवारें, अब जो भी उठाएँगे मिल जुल के उठाएँगे| बशीर बद्र