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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Jun 2024

    मुसाफ़िर भटक जाएँगे

    दिन में परियों की कोई कहानी न सुन, जंगलों में मुसाफ़िर भटक जाएँगे| बशीर बद्र 

  • 5th Jun 2024

    लौट के अपने घर!

    ये परिंदे भी खेतों के मज़दूर हैं, लौट के अपने घर शाम तक जाएँगे| बशीर बद्र 

  • 5th Jun 2024

    तिरे हाथ थक जाएँगे!

    नाम पानी पे लिखने से क्या फ़ाएदा, लिखते लिखते तिरे हाथ थक जाएँगे| बशीर बद्र 

  • 5th Jun 2024

    फूलों से ढक जाएँगे!

    रफ़्ता रफ़्ता हर इक ज़ख़्म भर जाएगा, सब निशानात फूलों से ढक जाएँगे| बशीर बद्र 

  • 5th Jun 2024

    दुश्मनी का सफ़र!

    दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम, तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएँगे| बशीर बद्र 

  • 5th Jun 2024

    हमने अल्फ़ाज़ को!

    हम ने अल्फ़ाज़ को आइना कर दिया, छपने वाले ग़ज़ल में चमक जाएँगे| बशीर बद्र 

  • 5th Jun 2024

    क्यों उसको जीवन भार न हो!

    आज एक बार फिर से मैं हिन्दी गीतों के राजकुंवर कहलाने वाले स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी ने हिन्दी साहित्य और हिन्दी फिल्मों को कुछ अमूल्य गीत दिए हैं| नीरज जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय…

  • 4th Jun 2024

    वो गुलाबी कटोरे!

    घर से निकले अगर हम बहक जाएँगे, वो गुलाबी कटोरे छलक जाएँगे| बशीर बद्र 

  • 4th Jun 2024

    हम फूल सही लेकिन!

    जब साथ न दे कोई आवाज़ हमें देना, हम फूल सही लेकिन पत्थर भी उठाएँगे| बशीर बद्र 

  • 4th Jun 2024

    वो धूप के छप्पर हों!

    वो धूप के छप्पर हों या छाँव की दीवारें, अब जो भी उठाएँगे मिल जुल के उठाएँगे| बशीर बद्र 

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