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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Sep 2024

    मिसाल-ए-क़तरा!

    मिलो जो हम से तो मिल लो कि हम ब-नोक-ए-गियाह,मिसाल-ए-क़तरा-ए-शबनम रहे रहे न रहे| नज़ीर अकबराबादी

  • 20th Sep 2024

    हवा के बीच कोई!

    बक़ा हमारी जो पूछो तो जूँ चराग़-ए-मज़ार,हवा के बीच कोई दम रहे रहे न रहे| नज़ीर अकबराबादी

  • 20th Sep 2024

    दम रहे रहे न रहे!

    मुझे है नज़्अ’ वो आता है देखने अब आह,कि उस के आने तलक दम रहे रहे न रहे| नज़ीर अकबराबादी

  • 20th Sep 2024

    हम रहे रहे न रहे!

    रहें वो शख़्स जो बज़्म-ए-जहाँ की रौनक़ हैं,हमारी क्या है अगर हम रहे रहे न रहे| नज़ीर अकबराबादी

  • 20th Sep 2024

    हम अश्क-ए-ग़म हैं!

    हम अश्क-ए-ग़म हैं अगर थम रहे रहे न रहे,मिज़ा पे आन के टुक जम रहे रहे न रहे| नज़ीर अकबराबादी

  • 20th Sep 2024

    केवल हिम!

    आज एक बार फिर मैं विख्यात हिन्दी कवि स्वर्गीय नरेश मेहता जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| | इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नरेश मेहता जी की यह कविता – हिम, केवल हिम-अपने शिवःरूप मेंहिम ही हिम अब!रग-गंध सब परित्याग करभोजपत्रवत हिमाच्छादितवनस्पित से हीनधरित्री-स्वयं…

  • 19th Sep 2024

    क़यामत यक़ीनन क़रीब!

    क़यामत यक़ीनन क़रीब आ गई है‘ख़ुमार’ अब तो मस्जिद में जाने लगे हैं ख़ुमार बाराबंकवी

  • 19th Sep 2024

    अब ऐसे भी तूफ़ान !

    हवाएँ चलीं और न मौजें ही उट्ठींअब ऐसे भी तूफ़ान आने लगे हैं ख़ुमार बाराबंकवी

  • 19th Sep 2024

    ये कहने में मुझ को!

    ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ कोये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं ख़ुमार बाराबंकवी

  • 19th Sep 2024

    वो पत्थर मिरे घर में!

    हटाए थे जो राह से दोस्तों कीवो पत्थर मिरे घर में आने लगे हैं ख़ुमार बाराबंकवी

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