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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Sep 2024

    ये फ़ाएदा है तिरे!

    नया बहाना है हर पल उदास होने का,ये फ़ाएदा है तिरे घर के पास होने का| राहत इंदौरी

  • 25th Sep 2024

    मिरा मिज़ाज नहीं!

    सबब वो पूछ रहे हैं उदास होने का,मिरा मिज़ाज नहीं बे-लिबास होने का| राहत इंदौरी

  • 25th Sep 2024

    बूढ़ा है मगर पेड़!

    हर साल नए पत्ते बदल देते हैं तेवर,बूढ़ा है मगर पेड़ पुराना नहीं लगता| वसीम बरेलवी

  • 25th Sep 2024

    प्यासे को कोई दूसरा!

    ख़ुद-ग़र्ज़ बना देती है शिद्दत की तलब भी,प्यासे को कोई दूसरा प्यासा नहीं लगता| वसीम बरेलवी

  • 25th Sep 2024

    हैं सबसे मधुर वो गीत!

    आज एक बार मैं महान जनकवि स्वर्गीय शैलेन्द्र जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| शैलेन्द्र जी ने हमारी हिन्दी फिल्मों के माध्यम से भी बहुत से अमर गीत हमें दिए हैं| शैलेन्द्र जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शैलेन्द्र जी का यह गीत –…

  • 24th Sep 2024

    लहरों को किनारों पे!

    सीने से लिपटते ही पलट जाने पे ख़ुश हैं, लहरों को किनारों पे भरोसा नहीं लगता| वसीम बरेलवी

  • 24th Sep 2024

    इस शहर में क्या है!

    तुम साथ नहीं हो तो कुछ अच्छा नहीं लगता,इस शहर में क्या है जो अधूरा नहीं लगता| वसीम बरेलवी

  • 24th Sep 2024

    मैं उस मकान में!

    मैं उस मकान में रहता हूँ और ज़िंदा हूँ,‘वसीम’ जिस में हवा का गुज़र नहीं होता| वसीम बरेलवी

  • 24th Sep 2024

    हमारी आँख के आँसू!

    हमारी आँख के आँसू की अपनी दुनिया है,किसी फ़क़ीर को शाहों का डर नहीं होता| वसीम बरेलवी

  • 24th Sep 2024

    मैं इक सदा हूँ!

    मुझे तलाश करोगे तो फिर न पाओगे,मैं इक सदा हूँ सदाओं का घर नहीं होता| वसीम बरेलवी

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