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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th Oct 2024

    नगर परिंदों का ग़ोल!

    ये नगर परिंदों का ग़ोल है,जो गिरा है दाना-ओ-दाम पर| मुनीर नियाज़ी

  • 10th Oct 2024

    रौशनी किसी बाम पर!

    किसी इंतिज़ार-ए-नज़र में है,कोई रौशनी किसी बाम पर| मुनीर नियाज़ी

  • 10th Oct 2024

    पहाड़ है मिरे सामने!

    ये पहाड़ है मिरे सामने,कि किताब मंज़र-ए-आम पर| मुनीर नियाज़ी

  • 10th Oct 2024

    साया मेरे कलाम पर!

    कोई दाग़ है मिरे नाम पर,कोई साया मेरे कलाम पर| मुनीर नियाज़ी

  • 10th Oct 2024

    चुनाव के बहाने!

    आज हरियाणा चुनावों के बहाने कुछ चर्चा करने का मन हो रहा है| वैसे चुनाव तो उसके साथ ही जम्मू कश्मीर में भी हुए थे, लेकिन वो तो मेरे लिए अलग दुनिया है, कभी वहाँ गया भी नहीं हूँ और वहाँ के राजनैतिक समीकरणों की मुझे अधिक जानकारी नहीं है, जबकि हरियाणा के गुड़गांव में…

  • 9th Oct 2024

    बुरी नज़र से रखो!

    है भोला-भाला सा चेहरा अदाएँ भी हैं हसीं,बुरी नज़र से रखो ख़ुद को तुम बचाए हुए| साहिर लखनवी

  • 9th Oct 2024

    चले भी आओ शब!

    चले भी आओ शब-ए-हिज्र बढ़ती जाती है,चराग़ दिल के लहू से हैं हम जलाए हुए| साहिर लखनवी

  • 9th Oct 2024

    बड़े जतन से जिन्हें!

    बड़े जतन से जिन्हें मुंतख़ब किया हम ने,वही सिरे से हमीं को हैं क्यों भुलाए हुए| साहिर लखनवी

  • 9th Oct 2024

    वो दिन गए थे जो!

    तुम्हीं को यारो मुबारक हों साग़र-ओ-मीना,वो दिन गए थे जो हम मै-कदा सजाए हुए| साहिर लखनवी

  • 9th Oct 2024

    दर्द है छुपाए हुए!

    हमीं नहीं ग़म-ओ-आलाम के सताए हुए,हर एक शख़्स कोई दर्द है छुपाए हुए| साहिर लखनवी

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