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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Apr 2025

    वो दर्द जो चेहरों से!

    ऐ प्यार तिरे हिस्से में आया तिरी क़िस्मत,वो दर्द जो चेहरों से अदा हो नहीं सकता| वसीम बरेलवी

  • 5th Apr 2025

    क़द मेरा बढ़ाने का!

    क़द मेरा बढ़ाने का उसे काम मिला है,जो अपने ही पैरों पे खड़ा हो नहीं सकता| वसीम बरेलवी

  • 5th Apr 2025

    एक आँख वाला इतिहास!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। दूधनाथ जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की यह कविता  –  मैंने कठैती हड्डियों वाला एक हाथ देखा– रंग में काला और धुन में कठोर ।…

  • 4th Apr 2025

    गुमराह किए होंगे!

    गुमराह किए होंगे कई फूल से जज़्बे,ऐसे तो कोई राह-नुमा हो नहीं सकता| वसीम बरेलवी

  • 4th Apr 2025

    क़तरा हूँ समुंदर से!

    जीना है तो ये जब्र भी सहना ही पड़ेगा,क़तरा हूँ समुंदर से ख़फ़ा हो नहीं सकता| वसीम बरेलवी

  • 4th Apr 2025

    जुदा हो नहीं सकता!

    आँखों में ख़यालात में साँसों में बसा है,चाहे भी तो मुझ से वो जुदा हो नहीं सकता| वसीम बरेलवी

  • 4th Apr 2025

    इक तू है जो लफ़्ज़ों में!

    तहरीर से वर्ना मिरी क्या हो नहीं सकता,इक तू है जो लफ़्ज़ों में अदा हो नहीं सकता| वसीम बरेलवी

  • 4th Apr 2025

    ख़ुशबू-ए-आवारा!

    हम ख़ुशबू-ए-आवारा हम नूर-ए-परेशाँ हैं,ऐ ‘बद्र’ मुक़द्दर में आशुफ़्ता-बयानी है| बशीर बद्र

  • 4th Apr 2025

    वो मिस्रा-ए-आवारा!

    वो मिस्रा-ए-आवारा दीवानों पे भारी है,जिस में तिरे गेसू की बे-रब्त कहानी है| बशीर बद्र

  • 4th Apr 2025

    वो हुस्न जिसे हमने!

    वो हुस्न जिसे हम ने रुस्वा किया दुनिया में,नादीदा हक़ीक़त है ना-गुफ़्ता कहानी है| बशीर बद्र

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