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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Nov 2024

    आते हैं आते होंगे!

    वो जो न आने वाला है ना उस से मुझ को मतलब था,आने वालों से क्या मतलब आते हैं आते होंगे| जौन एलिया

  • 13th Nov 2024

    मेरे पास आ जाते हैं!

    शाम हुए ख़ुश-बाश यहाँ के मेरे पास आ जाते हैं,मेरे बुझने का नज़्ज़ारा करने आ जाते होंगे| जौन एलिया

  • 13th Nov 2024

    जो उसको भाते होंगे!

    कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे,जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे| जौन एलिया

  • 13th Nov 2024

    सवाल ग़ुम जवाब ग़ुम!

    लबों से लब जो मिल गए, लबों से लब जो सिल गए,सवाल ग़ुम जवाब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 13th Nov 2024

    शब्द संभव हैं!

    आज मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय चंद्रकांत देवताले जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| देवताले जी की अधिक रचनाएं शायद मैंने पहले कभी शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय चंद्रकांत देवताले जी की यह कविता – तुम मुझसे पूछ रही होऔर मैं तुमसेपर सचमुच क्या हमारे बीचशब्द जीवित…

  • 12th Nov 2024

    हुई वही किताब ग़ुम!

    लिखा था जिस किताब में, कि इश्क़ तो हराम है,हुई वही किताब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 12th Nov 2024

    ख़ुद ही शम्मा बुझ गई!

    मुझे पिला रहे थे वो कि ख़ुद ही शम्मा बुझ गई,गिलास ग़ुम शराब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 12th Nov 2024

    बड़ी हसीन रात थी!

    चराग़-ओ-आफ़्ताब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी,शबाब की नक़ाब ग़ुम, बड़ी हसीन रात थी| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 12th Nov 2024

    वो भी पेश आये हैं!

    जिनके ख़ातिर कभी इल्ज़ाम उठाये, “फ़ाकिर”,वो भी पेश आये हैं इंसाफ़ के शाहों की तरह| सुदर्शन फ़ाकिर

  • 12th Nov 2024

    बस तेरी याद के!

    हर तरफ़ ज़ीस्त की राहों में कड़ी धूप है दोस्त,बस तेरी याद के साये हैं पनाहों की तरह| सुदर्शन फ़ाकिर

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