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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Nov 2024

    खो गए सवालों में!

    पहली बार नज़रों ने चाँद बोलते देखा,हम जवाब क्या देते खो गए सवालों में| बशीर बद्र #MoonTalking, #NoReply #LostInQuestions

  • 18th Nov 2024

    तेरे शहर वालों में!

    सौ ख़ुलूस बातों में सब करम ख़यालों में,बस ज़रा वफ़ा कम है तेरे शहर वालों में| बशीर बद्र #Regard, #Talks, #Ideas #Loyalty

  • 18th Nov 2024

    कच्ची नींद उचट गई!

    मिरी बंद पलकों पे टूट कर कोई फूल रात बिखर गया,मुझे सिसकियों ने जगा दिया मिरी कच्ची नींद उचट गई| बशीर बद्र #ClosedEyelids, #Sleep, #Flower

  • 18th Nov 2024

    मिरी ग़म की रात भी!

    न कोई ख़ुशी न मलाल है कि सभी का एक सा हाल है,तिरे सुख के दिन भी गुज़र गए मिरी ग़म की रात भी कट गई| बशीर बद्र #Happiness, #Grief #Night

  • 18th Nov 2024

    रौशनाई उलट गई!

    मुझे लिखने वाला लिखे भी क्या मुझे पढ़ने वाला पढ़े भी क्या,जहाँ मेरा नाम लिखा गया वहीं रौशनाई उलट गई| बशीर बद्र #WritingMe, #ReadingMe #MyName, #InkSpreads

  • 18th Nov 2024

    बदन से लिपट गई!

    तिरी याद आए तो चुप रहूँ ज़रा चुप रहूँ तो ग़ज़ल कहूँ,ये ‘अजीब आग की बेल थी मिरे तन-बदन से लिपट गई| बशीर बद्र #Memories #Silence, #WritingGhazal #CreeperOfFire

  • 18th Nov 2024

    एक मुट्ठी ज़मीन दे!

    मिरी ज़िंदगी भी मिरी नहीं ये हज़ार ख़ानों में बट गई,मुझे एक मुट्ठी ज़मीन दे ये ज़मीन कितनी सिमट गई| बशीर बद्र #Earth, #Life, #Shrinked, #DividedThousandTimes

  • 18th Nov 2024

    कन्याकुमारी : सूर्योदय : सूर्यास्त 

    आज मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| दूधनाथ सिंह जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले  शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की यह कविता  –  काले समन्दर में अचानक एक लाल स्तम्भ उगता है । लहर-लहर मारती है गैंती–टूटकर…

  • 17th Nov 2024

    कौन है किस जगह!

    उम्र करने को है पचास को पार,कौन है किस जगह पता रखना| निदा फ़ाज़ली ##Aging #KeepTrack #People

  • 17th Nov 2024

    हौसला रखना!

    मिलना-जुलना जहाँ ज़रूरी है,मिलने-जुलने का हौसला रखना| निदा फ़ाज़ली #MeetingPeople #CourageToMeet

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