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खो गए सवालों में!
पहली बार नज़रों ने चाँद बोलते देखा,हम जवाब क्या देते खो गए सवालों में| बशीर बद्र #MoonTalking, #NoReply #LostInQuestions
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तेरे शहर वालों में!
सौ ख़ुलूस बातों में सब करम ख़यालों में,बस ज़रा वफ़ा कम है तेरे शहर वालों में| बशीर बद्र #Regard, #Talks, #Ideas #Loyalty
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कच्ची नींद उचट गई!
मिरी बंद पलकों पे टूट कर कोई फूल रात बिखर गया,मुझे सिसकियों ने जगा दिया मिरी कच्ची नींद उचट गई| बशीर बद्र #ClosedEyelids, #Sleep, #Flower
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मिरी ग़म की रात भी!
न कोई ख़ुशी न मलाल है कि सभी का एक सा हाल है,तिरे सुख के दिन भी गुज़र गए मिरी ग़म की रात भी कट गई| बशीर बद्र #Happiness, #Grief #Night
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रौशनाई उलट गई!
मुझे लिखने वाला लिखे भी क्या मुझे पढ़ने वाला पढ़े भी क्या,जहाँ मेरा नाम लिखा गया वहीं रौशनाई उलट गई| बशीर बद्र #WritingMe, #ReadingMe #MyName, #InkSpreads
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बदन से लिपट गई!
तिरी याद आए तो चुप रहूँ ज़रा चुप रहूँ तो ग़ज़ल कहूँ,ये ‘अजीब आग की बेल थी मिरे तन-बदन से लिपट गई| बशीर बद्र #Memories #Silence, #WritingGhazal #CreeperOfFire
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एक मुट्ठी ज़मीन दे!
मिरी ज़िंदगी भी मिरी नहीं ये हज़ार ख़ानों में बट गई,मुझे एक मुट्ठी ज़मीन दे ये ज़मीन कितनी सिमट गई| बशीर बद्र #Earth, #Life, #Shrinked, #DividedThousandTimes
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कन्याकुमारी : सूर्योदय : सूर्यास्त
आज मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| दूधनाथ सिंह जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की यह कविता – काले समन्दर में अचानक एक लाल स्तम्भ उगता है । लहर-लहर मारती है गैंती–टूटकर…
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कौन है किस जगह!
उम्र करने को है पचास को पार,कौन है किस जगह पता रखना| निदा फ़ाज़ली ##Aging #KeepTrack #People
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हौसला रखना!
मिलना-जुलना जहाँ ज़रूरी है,मिलने-जुलने का हौसला रखना| निदा फ़ाज़ली #MeetingPeople #CourageToMeet