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आपस के टकराव!
होने लगे हैं रस्ते रस्ते, आपस के टकराव बहुत,एक साथ के चलने वालों में भी है अलगाव बहुत| क़ैसर शमीम
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गीतों की भाषा!
आज मैं श्रेष्ठ हिन्दी गीतकार श्री बालस्वरूप राही जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| राही जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत – तुम्हीं न समझी जब मेरे गीतों की भाषादुनिया सौ-सौ अर्थ लगाये क्या होता है यह…
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मोहब्बत की रिवायत!
झुकी नज़रों से तकना और ख़मोशी से गुज़र जाना,मोहब्बत की रिवायत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना| आदिल राही
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मैं तुझ को चाहता हूँ!
मैं तुझ को चाहता हूँ बात ये सच है मगर फिर भी, मुझे तेरी ज़रूरत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना| आदिल राही
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कहा भी था सियासत है!
हुए बर्बाद तो अब आह-ओ-ज़ारी कर रहे हो तुम,कहा भी था सियासत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना| आदिल राही
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उसे हँसने की आदत है!
तुम्ही को देख कर वो मुस्कुराता है तो हैरत क्या,उसे हँसने की आदत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना| आदिल राही
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ग़लत-फ़हमी में मत रहना!
उसे तुम से मोहब्बत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना,ये बस दिल की शरारत है ग़लत-फ़हमी में मत रहना| आदिल राही
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तिरे सिवा भी किसी को!
ये क्या सितम है कि इस नश्शा-ए-मोहब्बत में,तिरे सिवा भी किसी को पुकार आए हम| अज़हर इक़बाल
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फिर उस गली से बहुत!
फिर उस गली से गुज़रना पड़ा तिरी ख़ातिर,फिर उस गली से बहुत बे-क़रार आए हम| अज़हर इक़बाल
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जागो मन के सजग पथिक ओ!
आज मैं प्रसिद्ध आंचलिक कथा और उपन्यास लेखक तथा श्रेष्ठ हिन्दी कवि स्वर्गीय फणीश्वर नाथ रेणु जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| रेणु जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री स्वर्गीय फणीश्वर नाथ रेणु जी की यह कविता – मेरे मन के आसमान में…