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जो माल अच्छा है!
आँखें दिखलाते हो जोबन तो दिखाओ साहब,वो अलग बाँध के रक्खा है जो माल अच्छा है| अमीर मीनाई
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ये ख़याल अच्छा है!
आ गया उस का तसव्वुर तो पुकारा ये शौक़,दिल में जम जाए इलाही ये ख़याल अच्छा है| अमीर मीनाई
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देख ले बुलबुल ओ!
देख ले बुलबुल ओ परवाना की बेताबी को,हिज्र अच्छा न हसीनों का विसाल अच्छा है| अमीर मीनाई
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एक सवाल अच्छा है!
तुझ से माँगूँ मैं तुझी को कि सभी कुछ मिल जाए,सौ सवालों से यही एक सवाल अच्छा है| अमीर मीनाई
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कुछ सुन लें, कुछ अपनी कह लें!
आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार स्वर्गीय भगवतीचरण वर्मा जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी रचनाएं मैंने पहले शायद शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भगवतीचरण वर्मा जी की यह कविता- कुछ सुन लें, कुछ अपनी कह लें। जीवन-सरिता की लहर-लहर,मिटने को बनती यहाँ प्रियेसंयोग क्षणिक, फिर क्या जानेहम कहाँ…
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हम मरे जाते हैं!
अच्छे ईसा हो मरीज़ों का ख़याल अच्छा है, हम मरे जाते हैं तुम कहते हो हाल अच्छा है| अमीर मीनाई
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हम ने ही लौटने का!
हम ने ही लौटने का इरादा नहीं किया,उस ने भी भूल जाने का वा’दा नहीं किया| परवीन शाकिर
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कटे किसी का सफ़र!
तुम ने तो थक के दश्त में खे़मे लगा लिए,तन्हा कटे किसी का सफ़र तुम को इस से क्या| परवीन शाकिर
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सीपी में बन न पाए!
अब्र-ए-गुरेज़-पा को बरसने से क्या ग़रज़,सीपी में बन न पाए गुहर तुम को इस से क्या| परवीन शाकिर
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क्रान्तिकारी अकेला था!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि और समीक्षक स्वर्गीय भारत यायावर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| यायावर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भारत यायावर जी की यह कविता- क्रान्तिकारी अकेला थासोच रहा थाइतनी क्रान्तियाँ करके भी अकेला हूँक्यों अकेला…