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ख़्वाब है दीवाने का!
इक मुअ‘म्मा है समझने का न समझाने का, ज़िंदगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का| फ़ानी बदायुनी
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एक गोशा है ये दुनिया!
ख़ल्क़ कहती है जिसे दिल तिरे दीवाने का,एक गोशा है ये दुनिया इसी वीराने का| फ़ानी बदायुनी
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जिस में मोहब्बत मेरी!
किस ढिटाई से वो दिल छीन के कहते हैं ‘अमीर’,वो मिरा घर है रहे जिस में मोहब्बत मेरी| अमीर मीनाई
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तेरी तस्वीर में!
हुस्न और इश्क़ हम-आग़ोश नज़र आ जाते,तेरी तस्वीर में खिंच जाती जो हैरत मेरी| अमीर मीनाई
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आज क्यूँ दिल में छुपी!
यार पहलू में है तन्हाई है कह दो निकले,आज क्यूँ दिल में छुपी बैठी है हसरत मेरी| अमीर मीनाई
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यह किसका मन डोला!
आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी साहित्यकार स्वर्गीय माखनलाल चतुर्वेदी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय माखनलाल चतुर्वेदी जी की यह कविता- यह किसका मन डोला?मृदुल पुतलियों के उछाल पर,पलकों के हिलते तमाल पर,नि:श्वासों के ज्वाल-जाल पर,कौन लिख रहा व्यथा कथा?…
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शाम को सूरत मेरी!
आईना सुब्ह-ए-शब-ए-वस्ल जो देखा तो कहा, देख ज़ालिम ये थी शाम को सूरत मेरी| अमीर मीनाई
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बेदर्द नज़ाकत मेरी!
मैं ने आग़ोश-ए-तसव्वुर में भी खेंचा तो कहा,पिस गई पिस गई बेदर्द नज़ाकत मेरी| अमीर मीनाई
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हँस के फ़रमाते हैं वो!
हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी,क्यूँ तुम आसान समझते थे मोहब्बत मेरी| अमीर मीनाई
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गर्मी-ए-हुस्न में!
बर्क़ अगर गर्मी-ए-रफ़्तार में अच्छी है ‘अमीर’,गर्मी-ए-हुस्न में वो बर्क़-जमाल अच्छा है| अमीर मीनाई