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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 11th Dec 2024

    दिल मिरे ख़ून से!

    चश्म-ए-साक़ी असर-ए-मय से नहीं है गुल-रंग, दिल मिरे ख़ून से लबरेज़ है पैमाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 11th Dec 2024

    लिए जाते हैं जनाज़ा!

    हड्डियाँ हैं कई लिपटी हुई ज़ंजीरों में,लिए जाते हैं जनाज़ा तिरे दीवाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 11th Dec 2024

    दिल से पहुँची तो हैं!

    दिल से पहुँची तो हैं आँखों में लहू की बूँदें,सिलसिला शीशे से मिलता तो है पैमाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 11th Dec 2024

    यूँ बहकना नहीं अच्छा!

    अब इसे दार पे ले जा के सुला दे साक़ी,यूँ बहकना नहीं अच्छा तिरे मस्ताने का| फ़ानी बदायुनी

  • 11th Dec 2024

    आओ देखो न तमाशा!

    तुम ने देखा है कभी घर को बदलते हुए रंग,आओ देखो न तमाशा मिरे ग़म-ख़ाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 11th Dec 2024

    मिरे मर जाने का|!

    ज़िंदगी भी तो पशेमाँ है यहाँ ला के मुझे,ढूँडती है कोई हीला मिरे मर जाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 11th Dec 2024

    इस अफ़्साने का!

    मुख़्तसर क़िस्सा-ए-ग़म ये है कि दिल रखता हूँ,राज़-ए-कौनैन ख़ुलासा है इस अफ़्साने का| फ़ानी बदायुनी

  • 11th Dec 2024

     चलते चलते!

    आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी कवि स्वर्गीय भारत भूषण अग्रवाल जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ|  इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भारत भूषण अग्रवाल जी की यह कविता- मैं चाह रहा हूँ, गाऊँ केवल एक गान, आख़िरी समयपर जी में गीतों की भीड़ लगीमैं चाह…

  • 10th Dec 2024

    मेरे सनम-ख़ाने का!

    का’बे को दिल की ज़ियारत के लिए जाता हूँ,आस्ताना है हरम मेरे सनम-ख़ाने का| फ़ानी बदायुनी

  • 10th Dec 2024

    भेस है परवाने का!

    हुस्न है ज़ात मिरी इश्क़ सिफ़त है मेरी, हूँ तो मैं शम्अ मगर भेस है परवाने का| फ़ानी बदायुनी

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