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कोयल!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवियित्री स्वर्गीया सुभद्रा कुमारी चौहान जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीया सुभद्रा कुमारी चौहान जी की यह कविता – देखो कोयल काली है परमीठी है इसकी बोलीइसने ही तो कूक कूक करआमों में मिश्री घोली…
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प्रकृति संदेश!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय सोहन लाल द्विवेदी जी की एक बाल कविता शेयर कर रहा हूँ| द्विवेदी जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोहन लाल द्विवेदी जी की यह कविता – पर्वत कहता शीश उठाकर,तुम भी ऊँचे बन जाओ।सागर कहता है लहराकर,मन में गहराई…