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दर्द ने आ पकड़ा है!
फिर रँगे-हाथ मुझे दर्द ने आ पकड़ा है,फिर मोहब्बत का है इल्ज़ाम ख़ुदा ख़ैर करे| बाल स्वरुप राही
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है ये अफ़्वाह बड़े ज़ोर!
है ये अफ़्वाह बड़े ज़ोर पे हर महफ़िल में,उन को मुझ से है कोई काम ख़ुदा ख़ैर करे| बाल स्वरुप राही
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वो मुझ पे मेहरबान हैं!
लोग कहते हैं कि वो मुझ पे मेहरबान हैं फिर,उन के होंटों पे मिरा नाम ख़ुदा ख़ैर करे| बाल स्वरुप राही
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आज फिर रंग पे है!
आज फिर रंग पे है शाम ख़ुदा ख़ैर करे,फिर मिरे हाथ में है जाम ख़ुदा ख़ैर करे| बाल स्वरुप राही
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अंदाज़!
आज मैं हिंदी के अनूठे कवि स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। भवानी दादा की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की यह कविता – अंदाज़ लग जाता हैकि घिरने वाले हैं बादलफटने वाला है आसमान ख़त्म हो जाने वाला…