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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Feb 2025

    दर्द ने आ पकड़ा है!

    फिर रँगे-हाथ मुझे दर्द ने आ पकड़ा है,फिर मोहब्बत का है इल्ज़ाम ख़ुदा ख़ैर करे| बाल स्वरुप राही

  • 18th Feb 2025

    है ये अफ़्वाह बड़े ज़ोर!

    है ये अफ़्वाह बड़े ज़ोर पे हर महफ़िल में,उन को मुझ से है कोई काम ख़ुदा ख़ैर करे| बाल स्वरुप राही

  • 18th Feb 2025

    वो मुझ पे मेहरबान हैं!

    लोग कहते हैं कि वो मुझ पे मेहरबान हैं फिर,उन के होंटों पे मिरा नाम ख़ुदा ख़ैर करे| बाल स्वरुप राही

  • 18th Feb 2025

    आज फिर रंग पे है!

    आज फिर रंग पे है शाम ख़ुदा ख़ैर करे,फिर मिरे हाथ में है जाम ख़ुदा ख़ैर करे| बाल स्वरुप राही

  • 18th Feb 2025

    अंदाज़!

    आज मैं हिंदी के अनूठे कवि स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। भवानी दादा की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की यह कविता – अंदाज़ लग जाता हैकि घिरने वाले हैं बादलफटने वाला है आसमान ख़त्म हो जाने वाला…

  • 17th Feb 2025

    जी जाओ तो क्या!

    है यूँ भी ज़ियाँ और यूँ भी ज़ियाँ, जी जाओ तो क्या मर जाओ तो क्या| उबैदुल्लाह अलीम

  • 17th Feb 2025

    कुछ खोओ तो क्या!

    अब वहम है ये दुनिया इस में,कुछ खोओ तो क्या और पाओ तो क्या| उबैदुल्लाह अलीम

  • 17th Feb 2025

    बुझ जाओ तो क्या!

    जब देखने वाला कोई नहीं,बुझ जाओ तो क्या गहनाओ तो क्या| उबैदुल्लाह अलीम

  • 17th Feb 2025

    तुम आओ तो क्या!

    मैं तन्हा था मैं तन्हा हूँ,तुम आओ तो क्या न आओ तो क्या| उबैदुल्लाह अलीम

  • 17th Feb 2025

    फिर तुमसे आस !

    दुनिया भी वही और तुम भी वही,फिर तुम से आस लगाओ तो क्या| उबैदुल्लाह अलीम

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