Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 9th Aug 2025

    बिछड़ना है तो बिछड़ जा!

    बिछड़ना है तो बिछड़ जा इसी दो-राहे पर,कि मोड़ आगे सफ़र में कहीं नहीं आता| शहरयार

  • 9th Aug 2025

    पांव हुए पत्थर के-2

    कल एक नया गीत शेयर किया था, उसी शीर्षक से अपनी एक और नई रचना आज आप सुधीजनों के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ- कूदे हम खूब कभी कविता की रस्सी,अब तो लगता जैसे पाँव हुए पत्थर के| वह छलांग पहले की कविता में, बाहर भीमित्रों की महफिल में औ घर के अंदर भी, बेफिक्री…

  • 8th Aug 2025

    ये मेरा दिल है कि!

    ये मेरा दिल है कि मंज़र उजाड़ बस्ती का,खुले हुए हैं सभी दर मकीं नहीं आता| शहरयार

  • 8th Aug 2025

    जो होने वाला है!

    जो होने वाला है अब उस की फ़िक्र क्या कीजे,जो हो चुका है उसी पर यक़ीं नहीं आता| शहरयार

  • 8th Aug 2025

    जहाँ पे चाहिए आना!

    तिरा ख़याल भी तेरी तरह सितमगर है,जहाँ पे चाहिए आना वहीं नहीं आता| शहरयार

  • 8th Aug 2025

    नज़र जो कोई भी!

    नज़र जो कोई भी तुझ सा हसीं नहीं आता,किसी को क्या मुझे ख़ुद भी यक़ीं नहीं आता| शहरयार

  • 8th Aug 2025

    क़िस्सा-ए-दर्द में!

    क़िस्सा-ए-दर्द में ये बात कहाँ से आई,मैं बहुत हँसता हूँ जब कोई सुनाता है मुझे| शहरयार

  • 8th Aug 2025

    कैसे मिलाता है मुझे!

    तेरा मुंकिर नहीं ऐ वक़्त मगर देखना है,बिछड़े लोगों से कहाँ कैसे मिलाता है मुझे| शहरयार

  • 8th Aug 2025

    ख़्वाबों से पशेमानी है!

    मेरी इन आँखों को ख़्वाबों से पशेमानी है,नींद के नाम से जो हौल सा आता है मुझे| शहरयार

  • 8th Aug 2025

    कौन बुलाता है मुझे!

    रात का वक़्त है सूरज है मिरा राह-नुमा,देर से दूर से ये कौन बुलाता है मुझे| शहरयार

←Previous Page
1 … 335 336 337 338 339 … 1,527
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,136 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar