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सितारे शाम से पहले!
न जाने क्यूँ हमें इस दम तुम्हारी याद आती है,जब आँखों में चमकते हैं सितारे शाम से पहले| क़तील शिफ़ाई
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हम अधिकारी नहीं समय की अनुकम्पाओं के!
आज मैं विख्यात गीतकार स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। रंग जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का यह गीत– हम अधिकारी नहीं समय की अनुकम्पाओं के!पुराना सब कुछ बुरा न रहा,नया भी सब कुछ नहीं…
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मिरी तक़दीर का तारा!
गिरा है टूट कर शायद मिरी तक़दीर का तारा, कोई आवाज़ आई थी शिकस्त-ए-जाम से पहले| क़तील शिफ़ाई
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कोई गर्दिश नहीं थी!
ये आलम देख कर तू ने भी आँखें फेर लीं वर्ना,कोई गर्दिश नहीं थी गर्दिश-ए-अय्याम से पहले| क़तील शिफ़ाई
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तड़पती हैं तमन्नाएँ!
तड़पती हैं तमन्नाएँ किसी आराम से पहले,लुटा होगा न यूँ कोई दिल-ए-नाकाम से पहले| क़तील शिफ़ाई
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सिर्फ़ शाएर तू!
‘फ़राज़’ तू ने उसे मुश्किलों में डाल दिया,ज़माना साहब-ए-ज़र और सिर्फ़ शाएर तू| अहमद फ़राज़
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हो सके तो चला आ!
फ़ज़ा उदास है रुत मुज़्महिल है मैं चुप हूँ,जो हो सके तो चला आ किसी की ख़ातिर तू| अहमद फ़राज़
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ये हर मक़ाम पे !
हँसी-ख़ुशी से बिछड़ जा अगर बिछड़ना है,ये हर मक़ाम पे क्या सोचता है आख़िर तू| अहमद फ़राज़
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दुनिया तुझे बदल देगी!
मैं जानता हूँ कि दुनिया तुझे बदल देगी,मैं मानता हूँ कि ऐसा नहीं ब-ज़ाहिर तू| अहमद फ़राज़
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तिरा ख़याल कि शाख़!
मिरी मिसाल कि इक नख़्ल-ए-ख़ुश्क-ए-सहरा हूँ,तिरा ख़याल कि शाख़-ए-चमन का ताइर तू| अहमद फ़राज़