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चाँद में कैसे हुई क़ैद!
चाँद में कैसे हुई क़ैद किसी घर की ख़ुशी,ये कहानी किसी मस्जिद की अज़ाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली
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पानी पे लिखी तहरीरें!
कौन पढ़ सकता है पानी पे लिखी तहरीरें,किस ने क्या लिक्खा है ये आब-ए-रवाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली
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चाँद से फूल से या!
चाँद से फूल से या मेरी ज़बाँ से सुनिए,हर जगह आप का क़िस्सा है जहाँ से सुनिए| निदा फ़ाज़ली
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कोई अजनबी तो नहीं!
तुम्हारी बज़्म में अफ़्साना कहते डरता हूँ,ये सोचता हूँ यहाँ कोई अजनबी तो नहीं| कृष्ण बिहारी नूर
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ये ज़िंदगी तो नहीं!
ये हिज्र-ए-यार ये पाबंदियाँ इबादत की,किसी ख़ता की सज़ा है ये ज़िंदगी तो नहीं| कृष्ण बिहारी नूर
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मुसाहिबत है यक़ीनन!
ग़म-ए-हबीब कहाँ और कहाँ ग़म-ए-जानाँ,मुसाहिबत है यक़ीनन बराबरी तो नहीं| कृष्ण बिहारी नूर
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हयात ही के लिए!
हयात ही के लिए बे-क़रार है दुनिया,तिरे फ़िराक़ का मक़्सद हयात ही तो नहीं| कृष्ण बिहारी नूर
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सुनो, सुनो !
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री सुरेश ऋतुपर्ण जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कविताएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सुरेश ऋतुपर्ण जी की यह कविता – सुनो, सुनो !हवाओं में गूँज रहा है कैसाझरती पत्तियों कामध्यम-मध्यम संगीत ! सुनो, सुनो !शरद की अगवानी मेंवधू-प्रकृतिगा रही…