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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Jun 2025

    ख़ुशबू-ए-आवारा!

    हम ख़ुशबू-ए-आवारा हम नूर-ए-परेशाँ हैंऐ ‘बद्र’ मुक़द्दर में आशुफ़्ता-बयानी है बशीर बद्र

  • 9th Jun 2025

    जिसमें तिरे गेसू की!

    वो मिस्रा-ए-आवारा दीवानों पे भारी हैजिस में तिरे गेसू की बे-रब्त कहानी है बशीर बद्र

  • 9th Jun 2025

    ना-गुफ़्ता कहानी है!

    वो हुस्न जिसे हम ने रुस्वा किया दुनिया में,नादीदा* हक़ीक़त है ना-गुफ़्ता** कहानी है|*Unseen, **Untold बशीर बद्र

  • 9th Jun 2025

    यादों की कहानी है!

    दिन तल्ख़ हक़ाएक़ के सहराओं का सूरज है,शब गेसु-ए-अफ़्साना यादों की कहानी है| बशीर बद्र

  • 9th Jun 2025

    क्या जान गँवानी है!

    इस हौसला-ए-दिल पर हम ने भी कफ़न पहना,हँस कर कोई पूछेगा क्या जान गँवानी है| बशीर बद्र

  • 9th Jun 2025

    आँसू कभी शीशा है!

    ग़म वज्ह-ए-फ़िगार-ए-दिल ग़म वज्ह-ए-क़रार-ए-दिल,आँसू कभी शीशा है आँसू कभी पानी है| बशीर बद्र

  • 9th Jun 2025

    मुल्क-ए-जवानी है!

    ऐ पीर-ए-ख़िरद-मंदाँ दिल की भी ज़रूरत है,ये शहर-ए-ग़ज़ालाँ है ये मुल्क-ए-जवानी है| बशीर बद्र

  • 9th Jun 2025

    जिस चाँद से मुँह!

    जिस संग पे नज़रें कीं ख़ुर्शीद-ए-हक़ीक़त है,जिस चाँद से मुँह मोड़ा पत्थर की कहानी है| बशीर बद्र

  • 9th Jun 2025

    मृत्तिका दीप!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय शिवमंगल सिंह सुमन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| सुमन जी की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिवमंगल सिंह सुमन जी की यह कविता – मृत्तिका का दीप तब तक जलेगा अनिमेषएक भी कण स्नेह का जब तक…

  • 8th Jun 2025

    ठहरा हुआ दरिया है!

    दिल से जो छटे बादल तो आँख में सावन है,ठहरा हुआ दरिया है बहता हुआ पानी है| बशीर बद्र

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