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ख़ुशबू-ए-आवारा!
हम ख़ुशबू-ए-आवारा हम नूर-ए-परेशाँ हैंऐ ‘बद्र’ मुक़द्दर में आशुफ़्ता-बयानी है बशीर बद्र
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जिसमें तिरे गेसू की!
वो मिस्रा-ए-आवारा दीवानों पे भारी हैजिस में तिरे गेसू की बे-रब्त कहानी है बशीर बद्र
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ना-गुफ़्ता कहानी है!
वो हुस्न जिसे हम ने रुस्वा किया दुनिया में,नादीदा* हक़ीक़त है ना-गुफ़्ता** कहानी है|*Unseen, **Untold बशीर बद्र
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यादों की कहानी है!
दिन तल्ख़ हक़ाएक़ के सहराओं का सूरज है,शब गेसु-ए-अफ़्साना यादों की कहानी है| बशीर बद्र
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क्या जान गँवानी है!
इस हौसला-ए-दिल पर हम ने भी कफ़न पहना,हँस कर कोई पूछेगा क्या जान गँवानी है| बशीर बद्र
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आँसू कभी शीशा है!
ग़म वज्ह-ए-फ़िगार-ए-दिल ग़म वज्ह-ए-क़रार-ए-दिल,आँसू कभी शीशा है आँसू कभी पानी है| बशीर बद्र
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मुल्क-ए-जवानी है!
ऐ पीर-ए-ख़िरद-मंदाँ दिल की भी ज़रूरत है,ये शहर-ए-ग़ज़ालाँ है ये मुल्क-ए-जवानी है| बशीर बद्र
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जिस चाँद से मुँह!
जिस संग पे नज़रें कीं ख़ुर्शीद-ए-हक़ीक़त है,जिस चाँद से मुँह मोड़ा पत्थर की कहानी है| बशीर बद्र
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मृत्तिका दीप!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय शिवमंगल सिंह सुमन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| सुमन जी की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिवमंगल सिंह सुमन जी की यह कविता – मृत्तिका का दीप तब तक जलेगा अनिमेषएक भी कण स्नेह का जब तक…
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ठहरा हुआ दरिया है!
दिल से जो छटे बादल तो आँख में सावन है,ठहरा हुआ दरिया है बहता हुआ पानी है| बशीर बद्र