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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 11th Jun 2025

    अहसान तुम्हारा!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी का एक अधूरा गीत  शेयर कर रहा हूँ| निर्धन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी का यह गीत – इतनी बड़ी भीड़ में केवल, था मेरा ही कण्ठ अकेलातुमने स्वर दे…

  • 10th Jun 2025

    नक़्श अधूरा रक्खे!

    किन शिकस्तों के शब-ओ-रोज़ से गुज़रा होगा,वो मुसव्विर जो हर इक नक़्श अधूरा रक्खे| वसीम बरेलवी

  • 10th Jun 2025

    ज़िंदगी तुझ पे अब!

    ज़िंदगी तुझ पे अब इल्ज़ाम कोई क्या रक्खे,अपना एहसास ही ऐसा है जो तन्हा रक्खे| वसीम बरेलवी

  • 10th Jun 2025

    मैं उस मकान में !

    मैं उस मकान में रहता हूँ और ज़िंदा हूँ,‘वसीम’ जिस में हवा का गुज़र नहीं होता| वसीम बरेलवी

  • 10th Jun 2025

    किसी फ़क़ीर को !

    हमारी आँख के आँसू की अपनी दुनिया है,किसी फ़क़ीर को शाहों का डर नहीं होता| वसीम बरेलवी

  • 10th Jun 2025

    मैं इक सदा हूँ!

    मुझे तलाश करोगे तो फिर न पाओगे,मैं इक सदा हूँ सदाओं का घर नहीं होता| वसीम बरेलवी

  • 10th Jun 2025

    मुझे भी ख़ाक में!

    मैं उस की आँख का आँसू न बन सका वर्ना,मुझे भी ख़ाक में मिलने का डर नहीं होता| वसीम बरेलवी

  • 10th Jun 2025

    कभी लहू से भी!

    कभी लहू से भी तारीख़ लिखनी पड़ती है,हर एक मा’रका बातों से सर नहीं होता| वसीम बरेलवी

  • 10th Jun 2025

    मुक़द्दर में घर नहीं!

    सभी का धूप से बचने को सर नहीं होता,हर आदमी के मुक़द्दर में घर नहीं होता| वसीम बरेलवी

  • 10th Jun 2025

    कोई रक्तपलाश!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवियित्री स्वर्गीय शांति सुमन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| शांति सुमन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है शांति सुमन जी की यह कविता – अबके इस होली में कोई रक्तपलाश खिलेअनुबन्धों की याद दिलाए, पीत कनेर हिले घाट नहाती लड़की…

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