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शराब पी के बड़े!
शराब पी के बड़े तज्रबे हुए हैं हमें,शरीफ़ लोगों को हम मशवरा नहीं देंगे| राहत इंदौरी
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जीवन विष पीते बीता!
आज मैं अपने एक मित्र और श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय श्याम निर्मम जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| निर्मम जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय श्याम निर्मम जी का यह नवगीत – रोग बहुत हैंलेकिन उनका कहीं निदान नहीं । ये कैसी अनहोनीजीवन विष पीते…
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कि हम फ़क़ीर तुझे!
यहाँ कहाँ तिरा सज्जादा आ के ख़ाक पे बैठ,कि हम फ़क़ीर तुझे बोरिया नहीं देंगे| राहत इंदौरी
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वो रास्ता नहीं देंगे!
रिवायतों की सफ़ें तोड़ कर बढ़ो वर्ना,जो तुम से आगे हैं वो रास्ता नहीं देंगे| राहत इंदौरी
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जो दर खुला है!
हमें तो सिर्फ़ जगाना है सोने वालों को,जो दर खुला है वहाँ हम सदा नहीं देंगे| राहत इंदौरी
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हों लाख ज़ुल्म मगर!
हों लाख ज़ुल्म मगर बद-दु’आ नहीं देंगे,ज़मीन माँ है ज़मीं को दग़ा नहीं देंगे| राहत इंदौरी
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अहसान तुम्हारा!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी का एक अधूरा गीत शेयर कर रहा हूँ| निर्धन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी का यह गीत – इतनी बड़ी भीड़ में केवल, था मेरा ही कण्ठ अकेलातुमने स्वर दे…