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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Jun 2025

    याद के दीपक!

    तुम्हारी याद के दीपक भी अब जलाना क्या,जुदा हुए हैं तो अहद-ए-वफ़ा निभाना क्या| अज़हर इक़बाल

  • 28th Jun 2025

    समुद्र का पानी!

    एक बार फिर से आज मैं राष्ट्रकवि के रूप में ख्याति प्राप्त, ओज और शृंगार दोनो प्रकार की अनेक अमर रचनाएं देने वाले कवि स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। दिनकर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर…

  • 27th Jun 2025

    लकड़ियाँ सुलगने में!

    मुस्तक़िल नहीं ‘अमजद’ ये धुआँ मुक़द्दर का,लकड़ियाँ सुलगने में देर कुछ तो लगती है|

  • 27th Jun 2025

    हुस्न के सँवरने में !

    हो चमन के फूलों का या किसी परी-वश का,हुस्न के सँवरने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद

  • 27th Jun 2025

    भीड़ वक़्त लेती है!

    भीड़ वक़्त लेती है रहनुमा परखने में,कारवान बनने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद

  • 27th Jun 2025

    सोचने समझने में !

    ज़लज़ले की सूरत में इश्क़ वार करता है,सोचने समझने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद

  • 27th Jun 2025

    तितलियाँ पकड़ने में!

    उन की और फूलों की एक सी रिदाएँ हैं,तितलियाँ पकड़ने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद

  • 27th Jun 2025

    रंग यूँ तो होते हैं!

    रंग यूँ तो होते हैं बादलों के अंदर ही,पर धनक के बनने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद

  • 27th Jun 2025

    ज़िंदगी समझने में!

    उम्र-भर की मोहलत तो वक़्त है तआ’रुफ़ का,ज़िंदगी समझने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद

  • 27th Jun 2025

    ख़्वाहिशें परिंदों से!

    ख़्वाहिशें परिंदों से लाख मिलती-जुलती हों,दोस्त पर निकलने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद

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