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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 11th Dec 2025

    ये देखना है सुकूँ!

    दर-ए-हबीब भी है बुत-कदा भी काबा भी,ये देखना है सुकूँ अब कहाँ से मिलता है| शमीम जयपुरी

  • 11th Dec 2025

    मधुर-मधुर मेरे दीपक जल!

    आज एक बार फिर मैं छायावाद युग की एक प्रमुख स्तंभ महादेवी वर्मा जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। महादेवी जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीया महादेवी वर्मा जी का यह गीत- मधुर-मधुर मेरे दीपक जल!युग-युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपलप्रियतम का पथ आलोकित कर! सौरभ…

  • 10th Dec 2025

    दास्ताँ से मिलता है!

    सुना है लूट लिया है किसी को रहबर ने, ये वाक़िआ तो मिरी दास्ताँ से मिलता है| शमीम जयपुरी

  • 10th Dec 2025

    इसी ज़मीं से इसी !

    इसी ज़मीं से इसी आसमाँ से मिलता है,ये कौन देता है आख़िर कहाँ से मिलता है| शमीम जयपुरी

  • 10th Dec 2025

    ज़मीं पे रह के दिमाग़ !

    ज़मीं पे रह के दिमाग़ आसमाँ से मिलता है,कभी ये सर जो तिरे आस्ताँ से मिलता है| शमीम जयपुरी

  • 10th Dec 2025

    मुबारक हो सबको समा ये सुहाना!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं फिल्म- मिलन के लिए मुकेश जी का गाया ये गाना, अपने स्वर में आपके साथ शेयर कर रहा हूँ- मुबारक हो सबको समा ये सुहानामैं खुश हूँ मेरे आंसुओं पे न जानामैं तो दीवाना, दीवाना, दीवाना! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद ।

  • 10th Dec 2025

    हम बहुत रोए !

    बैठ कर साया-ए-गुल में ‘नासिर’,हम बहुत रोए वो जब याद आया| नासिर काज़मी

  • 10th Dec 2025

    फिर कई लोग !

    फिर कई लोग नज़र से गुज़रे,फिर कोई शहर-ए-तरब* याद आया|*City Of Happiness नासिर काज़मी

  • 10th Dec 2025

    जब वो रुख़्सत हुआ!

    हाल-ए-दिल हम भी सुनाते लेकिन,जब वो रुख़्सत हुआ तब याद आया| नासिर काज़मी

  • 10th Dec 2025

    छत से कूदती महिला!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज फिर से मैं स्वर्गीय ओम प्रकाश आदित्य जी की एक हास्य कविता शेयर कर रहा हूँ, जिसमें उन्होंने छत से कूदने को तैयार लग रही एक महिला को लेकर विभिन्न प्रसिद्ध कवियों के अंदाज़ में प्रतिक्रियाएं प्रस्तुत की हैं। प्रस्तुत है आदित्य जी की यह प्रसिद्ध कविता मेरे…

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