-
हौसला है ख़्वाबों का!
देखें इस कशाकश का इख़्तिताम हो कब तक,जागने की ख़्वाहिश है हौसला है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर
-
दिल, मेरी कायनात अकेली है—और मैं !
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय शमशेर बहादुर सिंह जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। शमशेर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शमशेर बहादुर सिंह जी की यह रचना – दिल, मेरी कायनात अकेली है—और मैं !बस अब ख़ुदा की जात अकेली है, और…
-
एक शब के टुकड़ों के!
एक शब के टुकड़ों के नाम मुख़्तलिफ़ रखे, जिस्म-ओ-रूह का बंधन सिलसिला है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर
-
फ़ासला है ख़्वाबों का!
जागती हक़ीक़त तक रास्ता है ख़्वाबों का,दरमियाँ मिरे उन के फ़ासला है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर
-
ज़िंदगी ख्वाब है था हमें भी पता !
आज अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया फिल्म -छोटी-छोटी बातें’ का गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ-ज़िंदगी ख्वाब है था हमें भी पता, पर हमें ज़िंदगी से बहुत प्यार था’यह गीत शैलेंद्र जी ने लिखा था और इसका संगीत अनिल बिस्वास जी ने तैयार किया था- आज के लिए इतना ही नमस्कार *****
-
लहू में डूबी थी !
फिर इस के बाद मनाया न जश्न ख़ुश्बू का,लहू में डूबी थी फ़स्ल-ए-बहार क्या करते। अज़हर इक़बाल
-
वही सवाल मियाँ!
बस एक सुकूत* ही जिस का जवाब होना था,वही सवाल मियाँ बार बार क्या करते। *Silence अज़हर इक़बाल
-
तिरे बग़ैर समुंदर!
सफ़ीना ग़र्क़ ही करना पड़ा हमें आख़िर,तिरे बग़ैर समुंदर को पार क्या करते। अज़हर इक़बाल
-
हुई न ख़त्म तेरी!
हुई न ख़त्म तेरी रहगुज़ार क्या करते,तेरे हिसार से ख़ुद को फ़रार क्या करते। अज़हर इक़बाल