Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 6th Dec 2018

    तुम समुद्र की पुत्री हो!

    आज भी मैं विख्यात कवि नोबेल पुरस्कार विजेता- श्री पाब्लो नेरुदा की मूल रूप से ‘स्पेनिश’ भाषा में लिखी गई एक कविता के अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर उसका भावानुवाद और उसके बाद अंग्रेजी में अनूदित कविता, जिसका मैंने अनुवाद किया है, उसको प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा। आज के लिए पहले प्रस्तुत है मेरे…

  • 5th Dec 2018

    22. बैरी अंधियारे से कॉपी जंचवानी थी!

    चलिए पुराने पन्ने पलटते हुए, एक क़दम और आगे बढ़ते हैं। जीवन यात्रा का एक और पड़ाव और, एक और पुराना ब्लॉग! हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड का मऊभंडार में कारखाना था, जहाँ मेरा साक्षात्कार एवं चयन हुआ था, बड़े अधिकारी यहाँ बैठते थे। हमारे वरिष्ठ प्रबंधक (राजभाषा)- श्री गुप्ता जी भी यहाँ बैठते थे, वैसे वो…

  • 4th Dec 2018

    प्रेम गीतिका- 11

    आज भी मैं विख्यात कवि नोबेल पुरस्कार विजेता- श्री पाब्लो नेरुदा की मूल रूप से ‘स्पेनिश’ भाषा में लिखी गई एक कविता के अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर उसका भावानुवाद और उसके बाद अंग्रेजी में अनूदित कविता, जिसका मैंने अनुवाद किया है, उसको प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा। आज के लिए पहले प्रस्तुत है मेरे…

  • 3rd Dec 2018

    Travel Responsibly!

    So today again I am expressing my views based on a weekly prompt on #IndiSpire. I remember that when I visited Dubai, we travelled to many nearby areas with my son there, who has become an expert in driving as per the ‘right hand driving’ system there. One more thing which he had to always…

  • 1st Dec 2018

    WOW: The Last Time He Saw Her

    Raghav and Priyanka knew each other quite well, this much can be said without any doubt. They accidentally got in touch when Ragav had gone to watch a movie of his favorite heroine, which incidentally also featured the beloved hero of Priyanka. Both had gone to watch the opening show of the movie. Raghav had…

  • 30th Nov 2018

    बहुत दूर मत चली जाना

    आज भी मैं विख्यात कवि, नोबेल पुरस्कार विजेता- श्री पाब्लो नेरुदा की मूल रूप से ‘स्पेनिश’ भाषा में लिखी गई एक कविता के अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर उसका भावानुवाद और उसके बाद अंग्रेजी में अनूदित कविता, जिसका मैंने अनुवाद किया है, उसको प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा। आज के लिए पहले प्रस्तुत है मेरे…

  • 29th Nov 2018

    आज रात मैं लिख सकता हूँ

    आज भी मैं विख्यात कवि नोबेल पुरस्कार विजेता- श्री पाब्लो नेरुदा की जो मूलतः चिले से थे, की मूल रूप से ‘स्पेनिश’ भाषा में लिखी गई कविता, के अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर उसका भावानुवाद और उसके बाद अंग्रेजी में अनूदित मूल कविता, जिसका मैंने अनुवाद किया है, उसको प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा। आज…

  • 28th Nov 2018

    यदि तुम मुझे भूल जाओगी!

    आज से मैं विख्यात कवि, नोबेल पुरस्कार विजेता श्री पाब्लो नेरुदा जो मूलतः चिले से थे- की कुछ कविताओं का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा। उनकी स्पेनिश में लिखी गई मूल कविता के अंग्रेजी अनुवाद के आधार पर आज के लिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता…

  • 27th Nov 2018

    21. रेत के घरौंदों में सीप के बसेरे!

    जीवन यात्रा का एक पड़ाव और, एक पुराना ब्लॉग! जयपुर में रहते हुए ही मैंने हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की एक वैकेंसी देखी, हिंदी अनुवादक के लिए, यह कार्यपालक श्रेणी का पद था, जबकि आकाशवाणी में, मैं पर्यवेक्षकीय स्तर पर था, हालांकि पदनाम वही था। इसके अलावा वेतन में काफी अंतर था। मैंने आवेदन किया और…

  • 26th Nov 2018

    Violence and Democracy!

    Our world has gone through many stages in history. Our country was considered to be the torch bearer of wisdom, a Guru for the world. We never tried to capture the land or the kingdom of others. While there were big democracies in the world, our country was divided into so many kingdoms lately and…

←Previous Page
1 … 1,476 1,477 1,478 1,479 1,480 … 1,524
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
Loading Comments...
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,136 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar