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सोच समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला!
आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है ये पुरानी ब्लॉग पोस्ट- इंटरनेट पर ज्ञान देने वाले तो भरे पड़े हैं, मैं तो अज्ञान का ही पक्षधर हूँ। जो व्यक्ति आज भी दिमाग के स्थान पर दिल पर अधिकतम भरोसा करते हैं, उनमें कवि-शायर काफी बड़ी संख्या में आते हैं। वहाँ भी…
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लंदन फिर से छूटा जाय!
यह आलेख भी मैंने पिछले वर्ष लंदन छोड़ने से पहले लिखा था, अब इसको थोड़ा बहुत एडिट करके फिर से प्रस्तुत कर रहा हूँ। डेढ़ महीने के प्रवास के बाद कल सुबह लंदन छोड़ देंगे। कल दोपहर की फ्लाइट यहाँ से है, सो सुबह ही घर छोड़ देंगे, हाँ उस समय जब भारत में दोपहर…
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कश्ती के मुसाफिर ने समुंदर नहीं देखा!
आज फिर से एक गज़ल शेयर करने का मन है। ये गज़ल है ज़नाब डॉ. बशीर बद्र जी की, जो वर्तमान उर्दू शायरों में एक अलग अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं, गज़ल में बहुत से एक्सपेरीमेंट किए हैं डॉ. बशीर बद्र जी ने। यह गज़ल भी एक अलग तरह की है और कुछ शेर…
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लंदन की खुरचन!
यह आलेख भी मैंने पिछले वर्ष लंदन छोड़ने से पहले लिखा था, अब इसको थोड़ा बहुत एडिट करके फिर से प्रस्तुत कर रहा हूँ। शीर्षक पढ़कर आप सोच सकते हैं कि मैं किस डिश, किस व्यंजन की बात कर रहा हूँ और क्या ऐसी कोई डिश भी लंदन की विशेषता है! दरअसल मुझे तो किसी…
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ये लंदन-वो दिल्ली!
यह आलेख मैंने पिछले वर्ष लंदन छोड़ने से पहले लिखा था, अब इस वर्ष फिर से वही घटना हो रही है तो थोड़ा बहुत एडिट करके फिर से प्रस्तुत कर रहा हूँ। पिछले वर्ष एक महीना रुका था, 6 जून से 6 जुलाई तक, इस बार प्रवास डेढ़ महीने का है, 6 अगस्त से 20…
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लंदन में शॉपिंग का एक और दिन!
इस वर्ष के लंदन प्रवास का आज अंतिम रविवार था। यह तो निश्चित ही है कि विज़िट करने और कराने वालों में महिलाएं भी हों तो कुछ समय तो शॉपिंग को भी देना ही पड़ता है। वैसे एक-दो बार छिटपुट शॉपिंग पहले भी हो चुकी है, एक दिन तो ‘ओ-2’ में ही लंच और उसके…
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इंग्लैंड का टॉवर ऑफ लंदन!
इस वर्ष का लंदन प्रवास भी अब संपन्न होने को है। वास्तव में यह अंतिम सप्ताहांत है लंदन में इस बार के डेरे का! इस क्रम में आज हम जहाँ घूमने गए वह था- ‘ टॉवर ऑफ लंदन’ जिसे विश्व धरोहरों अर्थात ‘वर्ल्ड हेरिटेज’ की श्रेणी में शामिल किया गया है। यह ‘टॉवर ब्रिज’ की…
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Spending the weekend, free time after work!
Today the topic that I am discussing means differently for many people, depending on their age, profession, interests etc. Yes, how somebody spends his or her weekend or rather the free time after the working hours. Working hours also are different for different people, some people work in night shifts also, more so…
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इतना तो मेरे यार करो मैं नशे में हूँ!
आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है ये पुरानी ब्लॉग पोस्ट- जगजीत सिंह जी की गाई, शायर ज़नाब शहीद कबीर जी की इस गज़ल के बहाने आज बात शुरू करेंगे- ठुकराओ अब कि प्यार करो, मैं नशे में हूँ जो चाहो मेरे यार करो, मैं नशे में हूँ। गिरने…
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भटकता बादल- रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता
आज, काफी दिनों के अंतराल के बाद, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में…