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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 29th Jul 2020

    हमको दिवाना तुमको, काली घटा कहेंगे!

    हमारी फिल्में हों अथवा कहानी हो, उपन्यास हो, इन सबमें जीवन को ही तो चित्रित किया जाता है| और जीवन में अच्छे-बुरे सभी तरह के अनुभव होते हैं| जैसे दर्द भरे नगमे भी हमारी फिल्मों में बहुत सारे हैं, देशभक्ति के भी हैं, किसी भी भाव के लिए, जो हमारे मन में आ सकता है,…

  • 28th Jul 2020

    What is truth?

    Let’s talk a bit about truth. What is truth? Often it happens that we gather a number of facts and build a narrative to present something that we want people to believe and accept as truth. Firstly I would like to quote a Shair by Urdu poet Krishna Bihari ‘Noor’ Ji, he says- सच घटे…

  • 27th Jul 2020

    सर्द है अंगार की भाषा!

    हिन्दी काव्य मंचों के अद्भुद हस्ताक्षर माननीय सोम ठाकुर जी का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| यह गीत मंचों के मतलब का कम और पढ़ने और मनन करने का अधिक है| गीत में हमारे भटकाव और लक्ष्यों के ओझल होने की बात है| गीत में हमारे रोशनी से भरे संकल्पों की भी बात…

  • 26th Jul 2020

    जिसमें तहख़ानों में तहख़ाने लगे हैं!

    आज फिर से दुष्यंत कुमार जी की एक गजल शेयर कर रहा हूँ| दुष्यंत कुमार जी हिन्दी के एक प्रतिनिधि कवि थे लेकिन उनको सामान्य जनता के बीच विशेष ख्याति आपातकाल में लिखी गई गज़लों के कारण मिली थी, जिनको बाद में एक संकलन – ‘साये में धूप’ के रूप में प्रकाशित किया गया| प्रस्तुत…

  • 25th Jul 2020

    ये बर्फ आंच के आगे पिघल न जाए कहीं!

    आज फिर से दुष्यंत कुमार जी की एक गजल शेयर कर रहा हूँ| दुष्यंत कुमार जी हिन्दी के एक प्रतिनिधि कवि थे लेकिन उनको सामान्य जनता के बीच विशेष ख्याति आपातकाल में लिखी गई गज़लों के कारण मिली थी, जिनको बाद में एक संकलन – ‘साये में धूप’ के रूप में प्रकाशित किया गया|प्रस्तुत है…

  • 25th Jul 2020

    जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता!

    उर्दू के विख्यात शायर निदा फाजली साहब की एक गजल शेयर कर रहा हूँ, निदा साहब बड़ी सहज भाषा में बहुत गहरी बात कह देते हैं| उनकी कुछ पंक्तियाँ जो बरबस याद आ जाती हैं, वे हैं- ‘मैं रोया परदेस में, भीगा माँ का प्यार, दुख ने दुख से बात की, बिन चिट्ठी, बिन तार’,…

  • 24th Jul 2020

    कैसा मौसम है ये!

    आज हम ऐसे समय में चल रहे हैं जिसकी न किसी ने पहले कल्पना की होगी और निश्चित रूप से किसी ने इसकी कामना तो नहीं ही की होगी| जी हाँ कोरोना की महामारी का यह काल, पूरी मानव जाति को इसने त्रस्त करके रखा है| सब यही सोचते रहते हैं कि कब यह दौर…

  • 23rd Jul 2020

    पुष्पों का विद्यालय – रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 22nd Jul 2020

    राजा को खबर तक नहीं!

    आज मैं पंडित श्रीकृष्ण तिवारी जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ, जो मेरे हमनाम हैं (मैं शर्मा हूँ, वे तिवारी हैं), वाराणसी के निवासी हैं और उन्होंने कुछ बहुत सुंदर नवगीत लिखे हैं| मैंने अपनी संस्था के लिए किए गए आयोजनों में से एक में श्री तिवारी जी को बुलाया था जिसमें उन्होंने…

  • 21st Jul 2020

    आँचल बुनते रह जाओगे!

    लीजिए आज प्रस्तुत है, स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी का लिखा एक सुंदर गीत| रामावतार त्यागी जी किसी समय हिन्दी कवि सम्मेलनों में गूंजने वाला एक प्रमुख स्वर हुआ करते थे| यह गीत भी उनकी रचनाशीलता का एक उदाहरण है- मैं तो तोड़ मोह के बंधनअपने गाँव चला जाऊँगा,तुम आकर्षक सम्बन्धों का,आँचल बुनते रह जाओगे| मेला…

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