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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Jan 2021

    सौ बातों की एक बात है !

    लीजिए आज फिर से मैं कभी काव्य-मंचों के अत्यंत लोकप्रिय कवि रहे स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसमें उन्होंने बड़ी भावुकता के साथ यह चित्रण किया है, कि किस प्रकार हमको जीवन के सभी रंगों, सभी प्रकार की परिस्थितियों, कभी साथ और कभी अकेलेपन का सामना करना पड़ता है|…

  • 6th Jan 2021

    फ़ाइल के कोरे पन्ने भरते-भरते!

    कविताओं के बारे में, एक बात कहना चाहूँगा, मैं यहाँ जो कविताएं शेयर करता हूँ, अधिकतर वे हमारे जमाने के कवियों की होती हैं, जो कवि सम्मेलनों में अपनी गीत-कविताओं के माध्यम से धूम मचाते थे| अब तो कवि सम्मेलनों का वैसा वातावरण नहीं रहा और मैं भी गोवा में हूँ, जहां ऐसी गतिविधियां देख-सुन…

  • 5th Jan 2021

    किसान आंदोलन और कम्युनिस्टों के मंसूबे!

    किसान नेताओं के साथ सरकार की वार्ता के एक और दौर में सफलता नहीं मिल पाई, कम्युनिस्ट लोग और हताश कांग्रेसी प्रसन्न होंगे कि उनके मंसूबे अभी तक कामयाब हो रहे हैं| मैं विशेष रूप से इस सच्चाई का उल्लेख करना चाहूँगा कि इस आंदोलन के नेतृत्व में 40 किसान संघों के नेता हैं, जिनमें…

  • 4th Jan 2021

    इंसान कहाँ तक पहुँचे!

    हिन्दी काव्य मंचों के अत्यंत लोकप्रिय कवि रहे स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी को ‘गीतों का राजकुंवर’ भी कहा जाता है और हमारी फिल्मों को भी उन्होंने अनेक यादगार गीत दिए हैं| लीजिए आज प्रस्तुत कर रहा हूँ उनका यह गीत- हम तेरी चाह में,…

  • 3rd Jan 2021

    भाजपा की वेक्सीन!

    भारतवर्ष के आबादी की दृष्टि से सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री रहे श्रीमान अखिलेश यादव ने आज एक बयान दे डाला| अपने इस बयान के माध्यम से श्रीमान यादव जी ने यह बता दिया की खानदानी विरासत के दम पर भले ही श्रीमान जी इतने बड़े राज्य के मुख्य मंत्री तक रह…

  • 2nd Jan 2021

    तुम्हारा मन नहीं छूते!

    आज एक बार फिर से मैंने अपने एक प्रिय कवि स्वर्गीय किशन सरोज जी का एक गीत शेयर करना चाहा और किया भी, लेकिन मालूम हुआ की मैं कुछ महीने पहले ही उसे शेयर कर चुका था| लीजिए अब प्रस्तुत कर रहा हूँ उनका यह गीत- नीम तरू से फूल झरते हैँतुम्हारा मन नहीं छूतेबड़ा…

  • 2nd Jan 2021

    नैन में तिरता हुआ जल !

    आज एक बार फिर से मैं अपने एक प्रिय कवि स्वर्गीय किशन सरोज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जो गीतों के ऐसे सर्जक थे कि उनको बस सुनते ही जाने का मन होता था| लीजिए प्रस्तुत है आंसुओं की मारक शक्ति से भरा हुआ यह गीत- नींद सुख कीफिर हमें सोने न…

  • 1st Jan 2021

    नववर्ष 2021 !

    कोरोना की महामारी के माहौल में यह साल गुज़र गया और आखिर आ ही गया नया साल! एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट को संशोधित रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ|नववर्ष का शिशु, धरती पर अपने नन्हे पांव रख चुका है, इसकी अगवानी कीजिए। आज ज्ञान बघारने का समय नहीं है, यह सोचें कि क्या है जो…

  • 31st Dec 2020

    दिन की बुझी शिराओं में, एक और उमर आई!

    एक बार फिर से मैं आज अपने एक प्रिय कवि स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत है शाम का, बचपन में हमने गीत पढ़े थे ग्रामीण परिवेश पर शाम के, जब गोधूलि वेला में बैल रास्ते में धूल उड़ाते हुए घर लौटते हैं| यह शहरी परिवेश में शाम…

  • 30th Dec 2020

    इन दिलों में कौन सा दिल है !

    आज अकबर इलाहाबादी साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| लफ्जों की कारीगरी जो कविता/ग़ज़ल में होती है वह इसमें बाकायदा मौजूद है|प्रस्तुत है यह ग़ज़ल- कहाँ ले जाऊँ दिल, दोनों जहाँ में इसकी मुश्क़िल है ।यहाँ परियों का मज़मा है, वहाँ हूरों की महफ़िल है । इलाही कैसी-कैसी सूरतें तूने बनाई हैं,हर सूरत…

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