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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Jan 2021

    अभागों की टोली अगर गा उठेगी!

    स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक रचना आज शेयर कर रहा हूँ| भवानी दादा बातचीत के लहजे में कविता कहने के लिए प्रसिद्ध थे| उन्होंने अनेक बहुमूल्य काव्य संकलन हमें दिए हैं, जिनमें ‘बुनी हुई रस्सी’, ‘गीत फ़रोश’, ‘खुशबू के शिलालेख’, ‘त्रिकाल संध्या’ आदि शामिल हैं और उनके संकलन- ‘बुनी हुई रस्सी’ के लिए…

  • 16th Jan 2021

    सूर्यास्त : एक इंप्रेशन

    आज एक बार फिर से मैं स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| दुष्यंत कुमार जी को आपातकाल में लिखी गई उनकी गज़लों के कारण विशेष रूप से प्रसिद्धि मिली थी, जिनको उनके संकलन ‘साये में धूप’ में शामिल किया गया था और मैंने उनकी कुछ गज़लें पहले शेयर भी की…

  • 15th Jan 2021

    चाय-सी ठंडी हँसी, आँखें तराजू!

    एक बार फिर से मैं अपने एक प्रिय कवि और नवगीत विधा के प्रमुख हस्ताक्षर स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| रंजक जी ने हर प्रकार के गीत लिखे हैं और वे जुझारूपन और बेबाकी के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं| लीजिए प्रस्तुत है रंजक जी का यह…

  • 14th Jan 2021

    नए तीर हैं, निशाने ढूँढते हैं !

    प्रसिद्ध शायर अहमद फ़राज़ साहब की एक गजल आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| फ़राज़ साहब भारतीय उपमहाद्वीप के बहुत मशहूर शायर हैं, वैसे विभाजन के बाद वे पाकिस्तान में रहते थे | शायरी की दुनिया में फ़राज़ साहब बहुत मशहूर हैं और उनकी अनेक गज़लें जगजीत सिंह जी और गुलाम अली जी ने भी गायी…

  • 13th Jan 2021

    तरक्की के पैमाने!

    आज फिर से पुरानी पोस्ट का दिन है और मैं 2018 में हुई एक दुखद घटना की प्रतिक्रियास्वरूप लिखी अपनी एक पोस्ट, फिर से शेयर कर रहा हूँ| आज हम वर्ष 2018 में जी रहे हैं, सुना है हिंदुस्तान दुनिया की बड़ी ताक़त बन गया, आर्थिक शक्तिसंपन्न देशों में भारत की गिनती होने लगी है।…

  • 12th Jan 2021

    खेल का मेरा साथी- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। आज भी मैंने अनुवाद के लिए अंग्रेजी कविता को ऑनलाइन उपलब्ध कविताओं…

  • 11th Jan 2021

    अपनी रात की छत पर, कितना तन्हा होगा चांद!

    प्रसिद्ध लेखक, उपन्यासकार, पटकथा लेखक और गीतकार स्वर्गीय डॉक्टर राही मासूम रज़ा साहब की एक प्रसिद्ध ग़ज़ल मैं आज शेयर कर रहा हूँ| उनके उपन्यास – आधा गाँव, दिल एक सादा कागज, टोपी शुक्ला, मैं एक फेरीवाला आदि बहुत प्रसिद्ध हुए थे और बड़ी भावुकता और राजनीति पर पैनी दृष्टि के साथ उन्होंने ये उपन्यास…

  • 10th Jan 2021

    मोहब्बत रास्ता ही रास्ता है!

    आज मैं प्रसिद्ध उर्दू शायर जनाब असद भोपाली जी की एक खूबसूरत सी ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| इस छोटी सी ग़ज़ल में कुछ असरदार शेरों के माध्यम से शायर ने मुहब्बत के जज़्बे और हौसले को अभिव्यक्त किया है| लीजिए प्रस्तुत है ये खूबसूरत ग़ज़ल- न साथी है न मंज़िल का पता है,मोहब्बत रास्ता…

  • 9th Jan 2021

    बेहतरीन कलाकार- पंकज त्रिपाठी

    भारतीय फिल्म और सीरियलों की दुनिया में अनेक बेहतरीन कलाकार रहे हैं और आज मैं इस समय के एक अत्यंत प्रतिभाशाली कलाकार- श्री पंकज त्रिपाठी के बारे में बात करना चाहता हूँ| अभी पिछले एक सप्ताह में ही मैंने उनकी दो टेलीफ़िल्म, वेब सीरीज़ – देखीं- ‘कागज’, जो कल ही मैंने देखी और उससे पहले…

  • 8th Jan 2021

    यह अँधेरे की पिटारी, रास्ता यह साँप-सा!

    हिन्दी साहित्य में मेरी विशेष रुचि है और मैं अक्सर इसी विषय में लिखता हूँ और कविताएं आदि शेयर करता हूँ| लेकिन मेरी एक कमजोरी है, मुझे गीत-कविताओं से ज्यादा लगाव है और मैं उनको ज्यादा शेयर करता हूँ| लीजिए मैं आज स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ, जो…

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