Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 19th Feb 2021

    टूटी आवाज़ तो नहीं हूँ मैं!

    आज फिर से पुरानी पोस्ट का दिन है, लीजिए मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट, फिर से शेयर कर रहा हूँ| निदा फाज़ली साहब की एक गज़ल है- तन्हा तन्हा दुख झेलेंगे महफ़िल महफ़िल गाएँगेजब तक आँसू पास रहेंगे तब तक गीत सुनाएँगे। यह गज़ल पहले भी शायद मैंने शेयर की है, आज इस गज़ल का…

  • 18th Feb 2021

    न जाने किस गली में, ज़िंदगी की शाम हो जाए!

    आधुनिक उर्दू शायरी के प्रमुख हस्ताक्षर डॉ बशीर बद्र जी की एक ग़ज़ल आज शेयर कर रहा हूँ| डॉ बद्र शायरी में नया मुहावरा गढ़ने और  प्रयोग करने के लिए जाने जाते हैं| इस ग़ज़ल की विशेष बात ये है कि इसका अंतिम शेर जैसे एक मुहावरा बन गया, लोग अक्सर इसका प्रयोग करते हैं,…

  • 17th Feb 2021

    कितने दाग लगे चादर में!

    एक समय था जब दिल्ली में रहते हुए कवि सम्मेलनों, कवि गोष्ठियों आदि के माध्यम से अनेक श्रेष्ठ कवियों को सुनने का मौका मिलता है| अब वैसा माहौल नहीं रहा, एक तो ‘कोरोना’ ने भी बहुत कुछ बदल दिया है| हाँ तो पुराने समय के काव्य-मंचों पर उभरने वाले बहुत से कवि, जिनकी कविताएं मैं…

  • 16th Feb 2021

    Global Anti-India Band!

    Talking about present situations in our country is not easy. It is perhaps happening all over the world, like in America, after defeat of Trump in elections, in Myanmar recently through Military coup etc. but I would focus on the situation in India only. In India the farmers’ movement is the biggest news for last…

  • 15th Feb 2021

    ये बर्फ आंच के आगे पिघल न जाए कहीं!

    दुष्यंत कुमार जी की आपातकाल में लिखी गई कुछ ग़ज़ल और कविताएं मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| आज दुष्यंत जी की एक और ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ, जो उनके संकलन ‘साये में धूप’ में शामिल थी| लीजिए प्रस्तुत है यह ग़ज़ल- नज़र-नवाज़ नज़ारा बदल न जाए कहीं,जरा-सी बात है मुँह से निकल…

  • 14th Feb 2021

    ओ प्रवासी जल!

    डॉ कुँवर बेचैन मेरे गुरुजनों में रहे हैं| मैं उस कालेज में विज्ञान के विद्यार्थी के रूप में कुछ समय गया जिसमें वे हिन्दी साहित्य पढ़ाते थे| खैर उनसे परिचय तो बाद में कवि गोष्ठियों के माध्यम से हुआ और बाद में कुछ बार मैंने एक आयोजक की भूमिका निभाते हुए भी उनको कवि के…

  • 13th Feb 2021

    घुँघरू टूट गए!

    ज़नाब क़तील शिफाई जी भारतीय उप महाद्वीप के एक मशहूर शायर रहे हैं, कवि-कलाकार देशों की सीमाओं में नहीं बंधे होते| क़तील साहब की अनेक गज़लें जगजीत सिंह जी और अन्य गायकों ने गाई हैं| आज उनकी एक अलग किस्म की रचना शेयर कर रहा हूँ| एक ऐसा गीत जो वास्तव में मन के मुक्त…

  • 12th Feb 2021

    भाग न बाँचे कोय!

    आज फिर से मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| आज का ये गीत, शैलेंद्र जी ने उनके द्वारा ही निर्मित फिल्म- ‘तीसरी कसम’ के लिए ही लिखा था और शंकर जयकिशन जी के संगीत निर्देशन में इसे मुकेश जी ने अपने लाजवाब अंदाज़ में गाया है|…

  • 11th Feb 2021

    तेरा नाम ही लेना छोड़ दिया!

    आज फिर से मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| आज का ये शानदार गीत 1965 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘सहेली’ से है, जिसे लिखा है – इंदीवर जी ने और कल्याणजी आनंद जी के संगीत निर्देशन में इसे मुकेश जी ने अपने लाजवाब अंदाज़ में गाया…

  • 10th Feb 2021

    जोगियों का पता नहीं होता!

    आज एक आधुनिक कवि श्री शिव ओम अंबर जी की एक हिन्दी गजल शेयर कर रहा हूँ| आशा है आपको इस गजल का कथ्य और इसकी बेबाकी प्रभावित करेगी| लीजिए प्रस्तुत है यह ग़ज़ल- जो किसी का बुरा नहीं होता,शख़्स ऐसा भला नहीं होता। दोस्त से ही शिकायतें होंगी,दुश्मनों से गिला नहीं होता। हर परिन्दा…

←Previous Page
1 … 1,402 1,403 1,404 1,405 1,406 … 1,524
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,136 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar