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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th May 2018

    65. चंदू के चाचा, चांद पर!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग- आज भारत के एक महान कैरेक्टर के बारे में बात कर रहा हूँ, जिन्हें अपनी तारीफ एकदम पसंद नहीं है, लेकिन उनमें गुण इतने हैं कि मेरा मन हो रहा है कि आज उनके बारे में बात कर ही लें। आपने यह दृष्टांत तो सुना ही…

  • 9th May 2018

    202. हम अपने बुज़ुर्गों का ज़माना नहीं भूले!

    आज एक छोटी सी गज़ल सागर आज़मी जी की लिखी हुई शेयर करने का मन हो रहा है, जिसे जगजीत सिंह जी ने गाया है। आज जबकि ऐसा माहौल है कि लोग किसी न किसी बहाने से नफरत फैलाने के काम में लगे हैं, इस प्रकार की गज़लें, कविताएं अच्छा संदेश देती हैं। इसमें उन…

  • 8th May 2018

    64. आनंदोत्सव!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग- मैंने तीन दिनों तक चले श्री श्री रविशंकर जी द्वारा संचालित आनंदोत्सव में भाग लिया। ऐसे शिविर उनकी संस्था- ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ द्वारा आयोजित किए जाते रहते हैं, लेकिन जैसा मुझे बताया गया, 30 वर्षों के इन शिविरों के इतिहास में यह तीसरी बार था कि…

  • 7th May 2018

    63. आस्था के नगीने फक़त कांच हैं!

    आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग- आज सोशल मीडिया के बारे में बात कर लेता हूँ, ये ब्लॉग लिखने का मेरा उद्देश्य यही है कि मैं विभिन्न विषयों पर अपने विचारों को संकलित कर लूं और उसके बाद यदि कभी ऐसा मन बने तो इनमें से…

  • 6th May 2018

    201. देख लो क्या असर, कर दिया प्यार के नाम ने!

    एक साथी ब्लॉगर की ब्लॉग पोस्ट पढ़ी जो एक बॉस के बारे में थी, जो रिटायर होने के बाद अपने जूनियर के अधीन कुछ समय तक ‘एडवाइज़र’ के रूप में काम करते हैं, लेकिन बाद में वे यह महसूस करते हैं कि वहाँ स्वाभिमान की रक्षा करते हुए काम करते रहना संभव नहीं है और…

  • 5th May 2018

    62. वह जो नाव डूबनी है मैं उसी को खे रहा हूँ !

    आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है, एक और पुराना ब्लॉग- जिस प्रकार मौसम पर बात करना बहुत आसान सा काम होता है, टाइम पास वाला काम, अगर आप इसको भी काम कहना चाहें, उसी प्रकार अपने मुहल्ले के बारे में बात करना भी एक अच्छा टाइम-पास होता था, विशेष रूप…

  • 4th May 2018

    200. मैं अपने घर से चल पड़ा!

    आजकल काफी पुराने ब्लॉग दोहराता रहा हूँ, लेकिन फिर भी यह 200 वां ब्लॉग आ ही गया, एक यह भी डबल सेंचुरी हुई ना! कोई भी क्षेत्र हो, हम अक्सर कोई सपना पालकर उसके पीछे चलते जाते हैं। एक गीत की पंक्ति है-‘ एक छलिया आस के पीछे दौड़े तो यहाँ तक आए’ अथवा ‘वो…

  • 3rd May 2018

    61. अरुण यह मधुमय देश हमारा !

    आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है, पिछले वर्ष स्वाधीनता दिवस पर लिखा गया एक और पुराना ब्लॉग- आज याद आ रहा है, शायद 27 वर्ष तक, मैं स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर संदेश तैयार किया करता था, ये संदेश होते थे पहले 5 वर्ष (1983 से 1987)…

  • 2nd May 2018

    60. बच्चों के लिए जो धरती मां, सदियों से सभी कुछ सहती है!

    आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- सभी को समान अवसर मिले, यह कम्युनिस्टों का नारा हो सकता है, लेकिन इस विचार पर उनका एकाधिकार नहीं है। भारतीय विचार इससे कहीं आगे की बात करता है, हम समूचे विश्व को अपना परिवार मानते हैं। एक विचार जो…

  • 30th Apr 2018

    58. वहाँ पैदल ही जाना है…..!

    आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- आज ऐसे ही, गीतकार शैलेंद्र जी की याद आ गई। मुझे ये बहुत मुश्किल लगता है कि किसी की जन्मतिथि अथवा पुण्यतिथि का इंतज़ार करूं और तब उसको याद करूं। मैंने कहीं पढ़ा था कि शैलेंद्र जी इप्टा से जुड़े…

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