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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th Oct 2025

    जो हो सके तो!

    जो हो सके तो ज़ियादा ही चाहना मुझ को,कभी जो मेरी मोहब्बत में कुछ कमी देखो| जावेद अख़्तर

  • 12th Oct 2025

    मोहब्बतों में कहाँ!

    मोहब्बतों में कहाँ अपने वास्ते फ़ुर्सत,जिसे भी चाहे वो चाहे मिरी ख़ुशी देखो| जावेद अख़्तर

  • 12th Oct 2025

    जिनके होठों पे हंसी!

    आज मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से, अपने स्वर में ग़ुलाम अली साहब की गाई हुई एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ – जिनके होठों पे हंसी पांव में छाले होंगे आशा है आपको पसंद आएगी। नीचे दिए गए लिंक पर आप मेरे यूट्यूब चैनल से जुडेंगे तो अच्छा लगेगा- youtube.com/kris230450 धन्यवाद ।

  • 12th Oct 2025

    कहाँ पे लाई है तुमको!

    जब आईना कोई देखो इक अजनबी देखो,कहाँ पे लाई है तुम को ये ज़िंदगी देखो| जावेद अख़्तर

  • 12th Oct 2025

    मौत ने कहा!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। कुंवर नारायण जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुंवर नारायण जी का यह नवगीत – फ़ोन की घण्टी बजीमैंने कहा — मैं नहीं हूँऔर करवट बदल कर सो गया। दरवाज़े…

  • 11th Oct 2025

    ऊँची इमारतें तो!

    ऊँची इमारतें तो बड़ी शानदार हैं, लेकिन यहाँ तो रेन-बसेरे थे क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम

  • 11th Oct 2025

    दालान पूछते हैं कि!

    खम्बों पे ला के किस ने सितारे टिका दिए,दालान पूछते हैं कि दीवाने क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम

  • 11th Oct 2025

    किस ने मिटा दिए !

    किस ने मिटा दिए हैं फ़सीलों के फ़ासले,वाबस्ता जो थे हम से वो अफ़्साने क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम

  • 11th Oct 2025

    परिंदे थे क्या हुए!

    मुमकिन है कट गए हों वो मौसम की धार से,उन पर फुदकते शोख़ परिंदे थे क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम

  • 11th Oct 2025

    वो क़िस्से क्या हुए!

    हम से वो रत-जगों की अदा कौन ले गया,क्यूँ वो अलाव बुझ गए वो क़िस्से क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम

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