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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 27th Sep 2017

    84. जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाए तरुवर की छाया

    एनटीपीसी में अपनी सेवा के दौरान बहुत से सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन से जुड़ा रहा और इस सिलसिले में अनेक जाने-माने कवियों, कलाकारों से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, बहुत से श्रेष्ठ कवियों से तो मित्रता हो गई थी, बहुतों की कविताओं/गीतों को मैंने अपने ब्लॉग में उद्धृत भी किया है। कुछ अलग किस्म के…

  • 25th Sep 2017

    83. काम नए नित गीत बनाना

    काफी अरसा बीत गया यह ब्लॉग लिखते-लिखते, जैसा बाबा तुलसीदास जी ने कहा- स्वांतः सुखाय। सोशल मीडिया के ये मंच, जो विद्वानों से भरे पड़े हैं, वहाँ सोचा कि अनुभूतियों की बात ज्यादा से ज्यादा करूं। ऐसे ही एक दिन खयाल आया कि ब्लॉग लिखना शुरू किया जाए। इस बहाने अपनी कुछ कविताएं भी, जो…

  • 23rd Sep 2017

    82. कल और आएंगे, नगमों की खिलती कलियां चुनने वाले!

    अज्ञेय जी की एक कविता है-‘नए कवि से’, काफी लंबी कविता है, उसका कुछ हिस्सा यहाँ उद्धृत कर रहा हूँ-  आ, तू आ, हाँ, आ, मेरे पैरों की छाप-छाप पर रखता पैर, मिटाता उसे, मुझे मुँह भर-भर गाली देता- आ, तू आ। तेरा कहना है ठीक: जिधर मैं चला नहीं वह पथ था: मेरा आग्रह…

  • 22nd Sep 2017

    81. सरेआम अमानवीयता

    फेसबुक पर एक वीडिओ देखा जिसमें एक युवक को कई लोग मिलकर लाठियों से पीट रहे हैं और तमाशबीनों की भारी भीड़ चारों तरफ खड़ी इस दृश्य को देख रही है। बड़ा ही हृदय विदारक दृश्य था, ऐसा लगता ही नहीं था कि उस युवक को पीटने वाले इंसान थे, और चारों तरफ से घेरकर…

  • 20th Sep 2017

    80. एक सपने का अंत

    डॉ. कुंवर बेचैन की लिखी  पंक्तियां हैं- विरहिन की मांग सितारे नहीं संजो  सकते प्रेम के सूत्र नज़ारे नहीं पिरो सकते, मेरी कुटिया से ये माना कि महल ऊंचे हैं मेरे सपनों से मगर ऊंचे नहीं हो सकते। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी ने भी ऊंचे सपने देखने का महत्व बताया है, लेकिन सच्चाई है…

  • 19th Sep 2017

    79. मत्स्य कन्या

    अपने मित्र के दादाजी का सुनाया हुआ एक और किस्सा आपसे शेयर कर रहा हूँ, जैसा मैंने वादा किया था। इस किस्से में भी एक ऐसे जीव का उल्लेख है, जिसके बारे में हम सुनते तो हैं लेकिन हमने उसको देखा नहीं होता। यह घटना भी लगभग 100 वर्ष पुरानी है- मैं इसको घटना ही…

  • 18th Sep 2017

    78. इच्छाधारी सर्प

    आज एक वृतांत सुना रहा हूँ जो मैंने दिल्ली में अपने एक मित्र और सहकर्मी से सुना था, मेरे ये मित्र मूलतः मुल्तान के रहने वाले थे, मुझसे कुछ पहले ही रिटायर हो चुके हैं और अभी दिल्ली में रह रहे हैं। दो किस्से हैं, सच्ची घटनाएं जो उनको, उनके दादाजी ने सुनाई थीं। उस…

  • 16th Sep 2017

    Recreate: Going deep through music

    Ever listened to a musician a Sitar maestro may be in complete silence, the imaginations he has in his mind he recreates through the strings which he touches with his creative alertness he goes deep in the waves he creates and the audience awakens after going deep there everybody finding something he or she had…

  • 15th Sep 2017

    77. शैतान की फसल

    एक समस्या जिससे हमारा देश बहुत लंबे समय से जूझ रहा है और आज वह विश्वव्यापी समस्या बन गई है, वह है आतंकवाद की समस्या। आज पूरी दुनिया के देश तरक्की करने के रास्ते खोज रहे हैं, एक स्वस्थ प्रतियोगिता हो रही है दुनिया के देशों के बीच में, वहाँ की शासन व्यवस्था चाहे किसी…

  • 14th Sep 2017

    Journey called life

    When we talk about life, may be we can put forward our experiences with several adjectives, kinds of impressions, we are happy at times when we achieve desired results, we also get depressed, demotivated at times when our sincere efforts do not yield desired results. Whatever may be the case, one thing we can all…

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