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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 8th Nov 2021

    इंतज़ार!

    मुझे पता है किसे इंतज़ार कहते हैं,कि मैंने देखा है लम्हात को ठहरते हुए। मिलाप चंद राही

  • 8th Nov 2021

    तेरे शहर से गुज़रते हुए!

    ये वाकया है तेरे शहर से गुज़रते हुए,हरे हुए हैं कई ज़ख्म दिल के भरते हुए। मिलाप चंद राही

  • 8th Nov 2021

    लरजना ज़ुबां का!

    रवां-दवां थी, सियासत में रंग भरते हुए,लरज़ गई है ज़ुबां, दिल की बात करते हुए। मिलाप चंद राही

  • 8th Nov 2021

    अंग-अंग डोल गई रंग भरी बातें!

    आज एक बार फिर से मधुर और सृजनशील गीतकार सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम जी ने जहां राष्ट्र और राष्ट्रभाषा को लेकर बहुत प्रेरक गीत लिखे हैं, वहीं उन्होंने बहुत नाजुक मनोभावों और मनः स्थितियों का चित्रण भी अपने गीतों में बड़ी कुशलता से किया है| लीजिए आज प्रस्तुत…

  • 7th Nov 2021

    एक दिल एक तमन्ना के सिवा कुछ भी नहीं !

    आओ आने की करें बात, कि तुम आए हो,अब तुम आए हो तो मैं कौन सी शै नज़र करूँ,के मेरे पास सिवा मेहर–ओ–वफ़ा कुछ भी नहीं| एक दिल एक तमन्ना के सिवा कुछ भी नहीं | अली सरदार जाफ़री

  • 7th Nov 2021

    बिखर जाएगा, फिर रात का रंग!

    तुम नहीं आओगे जब, फिर भी तो तुम आओगे,ज़ुल्‍फ़ दर ज़ुल्‍फ़ बिखर जाएगा, फिर रात का रंग,शब–ए–तन्‍हाई में भी लुत्‍फ़–ए–मुलाक़ात का रंग| अली सरदार जाफरी

  • 7th Nov 2021

    महताब के खंज़र की तरह!

    तुम नहीं आए अभी, फिर भी तो तुम आए होरात के सीने में महताब के खंज़र की तरहसुब्‍हो के हाथ में ख़ुर्शीद के सागर की तरह| अली सरदार जाफ़री

  • 7th Nov 2021

    तब भी तो तुम आए थे!

    जब नहीं आए थे तुम, तब भी तो तुम आए थेआँख में नूर की और दिल में लहू की सूरतयाद की तरह धड़कते हुए दिल की सूरत| अली सरदार जाफरी

  • 7th Nov 2021

    अब मुझे चमन से क्या लेना!

    आज मैं मुकेश जी और लता जी का गाया एक युगल गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत 1971 में रिलीज हुई फिल्म- पारस के लिए लता जी और मुकेश जी ने कल्याणजी-आनन्दजी के संगीत निर्देशन में गाया था और इसे लिखा था इंदीवर जी ने|  यह रोमांटिक गीत आज भी श्रोताओं को अपनी मधुरता…

  • 6th Nov 2021

    तुम मेरी ग़ज़लें गाओगे!

    बेचैनी जब बढ जायेगी और याद किसी की आयेगी,तुम मेरी ग़ज़लें गाओगे जब इश्क़ तुम्हें हो जायेगा| सईद राही

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