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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 8th Mar 2018

    34. टूटी आवाज़ तो नहीं हूँ मैं!

    जीवन यात्रा के एक और पड़ाव के रूप में, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! अक्सर मैं ब्लॉग लिखने के बाद, सोचता हूँ कि इसमें कौन सी कविता डालनी है, क्या शीर्षक देना है। आज शुरू में ही कुछ काव्य पंक्तियां याद आ रही हैं और उनमें से ही शीर्षक भी, तो शुरू में…

  • 7th Mar 2018

    33. कैसे मनाऊं पियवा, गुन मेरे एकहू नाहीं!

    जीवन यात्रा के एक और पड़ाव के रूप में, लीजिए प्रस्तुत है, नितिन मुकेश जी के कार्यक्रम से संबंधित एक और पुराना ब्लॉग! इस प्रस्ताव को सहमति मिल गई थी कि एनटीपीसी के स्थापना दिवस के अवसर पर, विंध्याचल परियोजना में नितिन मुकेश जी, अथवा दो-तीन फिल्मी गायक और थे, उनमें से किसी एक को…

  • 6th Mar 2018

    32. मैं बोला मैं प्रेम दिवाना इतनी बातें क्या जानूं।

    जीवन यात्रा का एक और पड़ाव, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! विंध्याचल परियोजना में 12 वर्ष का प्रवास, बहुत घटनापूर्ण था और निराशा भी बहुत बार हुई इस दौरान। एक पदोन्नति समय पर मिल गई, जिससे भद्रजनों की भृकुटियां तन गईं, हिंदी अधिकारी और समय पर पदोन्नति, इसके बाद उन्होंने भरपूर कोशिश की…

  • 4th Mar 2018

    31. नींद भी खुली न थी, कि हाय धूप ढल गई !

    जीवन यात्रा का एक और पड़ाव, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! विंध्याचल परियोजना में प्रवास का ब्यौरा और ज्यादा लंबा नहीं चलेगा, अब इसको जल्दी ही समाप्त करना होगा। कवि सम्मेलनों जो कुछ अपनी उम्मीद के मुताबिक नहीं हुआ उसका ज़िक्र कर लेता हूँ। यह मेरा सौभाग्य ही था कि उस समय जहाँ…

  • 3rd Mar 2018

    30. कभी फुर्सत में कर लेना हिसाब, आहिस्ता-आहिस्ता!

    जीवन यात्रा का एक और पड़ाव, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! एनटीपीसी की सभी परियोजनाओं की तरह, विंध्याचल परियोजना में भी स्थापना दिवस के अवसर पर प्रतिवर्ष 7 नवंबर को बड़ा आयोजन किया जाता है। जैसा मैंने बताया इन आयोजनों में अभिजीत, अनूप जलोटा तथा जगजीत सिंह जैसे बड़े कलाकार आ चुके थे।…

  • 2nd Mar 2018

    164. बुला गई राधा प्यारी

    होली के पावन अवसर पर मैं, सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ, स्व. अल्हड़ बीकानेरी जी कि  लिखी इस आधुनिक रसिया के साथ- कान्हा बरसाने में आ जइयो, बुला गई राधा प्यारी।  असली माखन कहाँ मिलैगो, शॉर्टेज है भारी,  चर्बी वारौ बटर मिलैगो, फ्रिज में हे बनवारी,  आधी चम्मच मुख लिपटाय जइयो,  बुला गई राधा प्यारी। …

  • 1st Mar 2018

    163. राजभाषा हिंदी की ट्रैडमिल

    फिटनेस मेंटेन करने के लिए एक बहुत प्रभावी यंत्र बनाया गया, जो आजकल लोग ‘जिम’ में या कुछ संपन्न लोग अपने घरों में भी इस्तेमाल करते हैं। इस यंत्र में जिस पट्टे पर आप चल रहे हैं, वह पीछे खिसकता जाता है, जैसे आपके पांवों के नीचे से जमीन खिसकती जा रही हो और आप…

  • 28th Feb 2018

    29. एक बूंद पानी में एक वचन डूब गया!

    जीवन यात्रा का एक और पड़ाव, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! बीच के एक-दो ब्लॉग्स में कुछ छोटे लोगों का ज़िक्र हो गया था, मैं उनको दोहराकर उन लोगों को ज्यादा महत्व नहीं देना चाहता। अब विंध्याचल परियोजना के क्लबों का ज़िक्र कर लेते हैं। दो क्लब थे वहाँ पर, वीवा क्लब (विंध्याचल…

  • 27th Feb 2018

    25. अखबारों में, सेमीनारों में, जीता है आम आदमी!

    जीवन यात्रा का एक और पड़ाव, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! जैसा कि मैंने बताया, अब बारी थी मेरे सेवाकाल के अंतिम नियोजक, एनटीपीसी लिमिटेड के साथ जुड़ने की, जहाँ मेरी सेवा भी सबसे लंबी रही। 21 मार्च, 1988 को मैंने एनटीपीसी की विंध्याचल परियोजना में कार्यग्रहण किया, यहाँ मुझे सांस्कृतिक गतिविधियों के…

  • 26th Feb 2018

    24. और चुकने के लिए हैं, ऋण बहुत सारे!

    जीवन यात्रा का एक और पड़ाव, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! अब बारी थी, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की ही एक इकाई, खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स में कुछ समय प्रवास की, जयपुर के बाद एक बार फिर से राजस्थान में रहने का अवसर मिला था। राजस्थान के लोग बहुत प्रेम करने वाले हैं। लेकिन यह…

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