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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th Aug 2018

    250. नहीं रहे वाजपेयी जी!

    सक्रिय राजनीति में शामिल एक ऐसा नेता, जिसको देखकर, सुनकर लगता था कि राजनीतिज्ञ भी आदर के पात्र हो सकते हैं। एक ऐसा राजनेता जो पहले एक सहृदय कवि था और उसके बाद पॉलिटिशियन था। बचपन से, दिल्ली में रहकर उनको जनसभा में भी कई बार सुनने का अवसर मिला, टीवी पर बोलते हुए अथवा…

  • 16th Aug 2018

    249. अंतिम दिवस- आज जीवन का!

    और आखिर आज वह दिन आ ही गया! मैं एक साधारण प्राणी, भारत में जन्मा इस बात का गर्व है मुझे। वैसे गर्व करने के लिए और बहुत सी बातें नहीं हैं मेरे पास, लेकिन संतोष है, जो कुछ हासिल हुआ उसके लिए। भारत की राजधानी दिल्ली में जन्मा, बचपन गरीबी में बीता, फिर सेवा…

  • 15th Aug 2018

    109. एक ज़ख्म भर गया था, इधर ले के आ गया!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- हाँ यह पुरानी पोस्ट शेयर करने से पहले, मैं सभी साथियों को अपने प्यारे भारतवर्ष के स्वाधीनता दिवस की हार्दिक बधाई देता हूँ। आज सुदर्शन फाकिर जी की एक गज़ल के बहाने से बात करते हैं, जिसको जगजीत सिंह जी ने बड़े सुंदर तरीके से…

  • 14th Aug 2018

    248. उडुपि- धर्म और पर्यटन का केंद्र!

    आज उडुपि कि बारे में बात कर लेते हैं। बहुत दिन पहले किसी ने इस क्षेत्र के बारे में बताया था, इसलिए वहाँ जाने की योजना बनाई। सच्चाई तो यह है कि दो बार वहाँ की टिकट कराकर रद्द करनी पड़ी, अंततः वहाँ पिछले सप्ताहांत में जाने का अवसर आ ही गया। मैं गोआ में…

  • 13th Aug 2018

    247. पेंशन की टेंशन!

    मैं माननीय प्रधानमंत्री जी का ध्यान, सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्र के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की समस्या की ओर दिलाना चाहता हूँ। मैंने पहले भी माननीय प्रधानमंत्री जी की साइट पर इस संबंध में लिखा था, उसके बाद प्रधान मंत्री जी ने शायद ‘मन की बात’ कार्यक्रम इस विषय का उल्लेख भी किया था। पहली बात तो…

  • 13th Aug 2018

    108. जिसकी आवाज़ रुला दे, मुझे वो साज़ न दो!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- अपने प्रिय गायक मुकेश जी के दो गीत एक साथ याद आ रहे हैं, एक है- ‘पुकारो मुझे नाम लेकर पुकारो, मुझे इससे अपनी खबर मिल रही है’ और दूसरा है- ‘मुझको इस रात की तनहाई में आवाज़ न दो!’ दो एकदम विपरीत स्थितियां हैं,…

  • 11th Aug 2018

    107. ये बाज़ी हमने हारी है, सितारो तुम तो सो जाओ!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- क़तील शिफाई जी की एक गज़ल याद आ रही है, क्या निराला अंदाज़ है बात कहने का! शायर महोदय, जिनकी नींद उड़ गई है परेशानियों के कारण, वो रात भर जागते हैं, आसमान की तरफ देखते रहते हैं और उनको लगता है कि सितारे भी…

  • 10th Aug 2018

    106. मेरे क़ातिल ने कहीं जाम उछाले होंगे!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- अभिव्यक्ति, कविता, शेर-ओ-शायरी, ये सब ऐसे काम नहीं है कि जब चाहा लिख लिया और उसमें गुणवत्ता भी बनी रहे। दो शेर याद आ रहे हैं इस संदर्भ में- हम पे दुखों के पर्बत टूटे, तब हमने दो-चार कहे, उसपे भला क्या बीती होगी, जिसने…

  • 9th Aug 2018

    246. ब्लॉग लेखन और कमाई!

    अभी कुछ दिन पहले ही मैंने अपनी एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा था कि किस प्रकार मेरी एक प्रायोजित यात्रा में कुछ ऐसे ब्लॉगर साथियों से मुलाक़ात हुई जो ब्लॉग लेखन के माध्यम से अच्छी कमाई कर रहे हैं। अभी मैंने पाया कि #IndiSpire में इस विषय पर चर्चा हो रही है कि क्या धन…

  • 8th Aug 2018

    245. तंजानिया- दार-अस-सलाम, ज़ांज़ीबार- चित्रों कि ज़ुबानी!

    अब इस यात्रा की कुछ झलकियां, चित्रों के माध्यम से- आज के लिए इतना ही, नमस्कार।

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