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14. एक बूढ़ा आदमी है देश में या यूं कहें इस अंधेरी कोठरी में एक रोशनदान है।
जीवन में कोई कालखंड ऐसा होता है, कि उसमें से किस घटना को पहले संजो लें, समझ में नहीं आता है। अब उस समय को याद कर लेते हैं जब सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार और नाइंसाफी के विरुद्ध जयप्रकाश नारायण जी ने ‘संपूर्ण क्रांति’ आंदोलन चलाया हुआ था। इस आंदोलन ने पूरे देश को झकझोर…
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13. मंज़िल न दे, चराग न दे, हौसला तो दे
एक नाइंसाफी तो लंबे समय से चलती चली आई है कि इतिहास को राजाओं के शासन काल से बांट दिया गया, बल्कि इतिहास का मतलब सिर्फ इतना हो गया कि किस राजा ने किस समय तक शासन किया, कहाँ जीत-हार हासिल की, कौन से अच्छे-बुरे काम किए। मैंने भी यहाँ अपनी नौकरियों की अवधि के…
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12. सफर दरवेश है ऐ ज़िंदगी….
दिल्ली में रहते हुए मैंने पीताम्बर बुक डिपो और दिल्ली प्रेस में दो प्राइवेट नौकरी की थीं और उसके बाद 6 वर्ष तक उद्योग मंत्रालय में कार्य किया, जिसमें से मैं 3 वर्ष तक संसदीय राजभाषा समिति में डेपुटेशन पर भी रहा। खैर फिलहाल तो दिल्ली प्रेस की ही बात चल रही है। कुछ साहित्यिक…
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11. हम शंटिंग ट्रेन हो गए
पीताम्बर बुक डिपो में कुल मिलाकर मैं एक साल तक रहा, उसके बाद मैंने फैसला कर लिया कि अब यहाँ अधिक समय तक नहीं रहूंगा। अब तक इतना आत्मविश्वास आ गया था कि मैं इससे बेहतर काम खोज सकता हूँ। और हुआ भी ऐसा, यह काम छोड़ने के बाद एक महीने के अंदर ही दिल्ली…
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10. रोज़गार दफ्तर की फाइलें भरें
ऐसा हुआ कि आगे पढ़ाई जारी रखने की तो गुंजाइश नहीं बची थी और तुरंत कोई काम तलाशने की भी ज़रूरत थी। उन दिनों हमारे पड़ौस में ही एक सज्जन रहते थे, जो व्यवसायी थे और उनके कुछ संपर्क थे, सो उन्होंने एक संदर्भ दिया और उनकी सलाह पर मैंने चांदनी चौक में जाकर संपर्क…
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9. झूमती चली हवा
लगातार सीधी राह पर चलते जाने से भी काफी थकान हो जाती है, अतः थोड़ा इधर-उधर टहल लेते हैं। मैं यह भी बता दूं कि यहाँ अपनी निजी ज़िंदगी का विवरण देना मेरा उद्देश्य नहीं है। पात्र यदि कहीं आए हैं तो वे या तो पृष्ठभूमि के तौर पर आए हैं, या ऐसे पात्र आए…
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8. कालेज के दिन
जैसी बात हुई थी, अब बारी है कालेज के दिनों के बारे में बात करने की। बाबूराम स्कूल में 6 साल रहा और अच्छा खासा जुड़ाव रहा स्कूल से, इसलिए स्कूल के बारे में, वहाँ के शिक्षकों के बारे में भी मैंने कुछ बात की। यहाँ स्पष्ट कह दूं कि कालेज से मेरा कोई…
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7. बाबूराम स्कूल
अब स्कूल के बारे में बात कर लें। कक्षा 1 से 5 तक गौशाला वाले सनातन धर्म स्कूल के बारे में तो बताने को कुछ नहीं है। बाबूराम स्कूल के बारे में ही बात करूंगा जहाँ मेंने कक्षा 6 से 11 तक की पढ़ाई की थी। कुछ चित्र जो मस्तिष्क में आते हैं, वे धीरे-धीरे…
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6. परला घर
अपने मोहल्ले में कुछ समय तो और बिताना होगा। आज अपने वकील भाई साहब के बारे में बात कर लेते हैं, जिनके पास हम जाकर बसे थे इस मोहल्ले- भोलानाथनगर, शाहदरा में। वकील साहब मेरे मामा के बेटे होने के नाते मेरे बड़े भाई लगते थे, लेकिन असल में उनके बेटे मेरे हमउम्र, मुझसे एक-दो…
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मोहल्ला मेरा
अब थोड़ा समय उस मोहल्ले को भी दे दें, जो लगभग 25 वर्ष तक मेरा ठिकाना था। जैसा मैंने अपने पिछले ब्लॉग में लिखा था, दरियागंज छोड़कर हम भोलानाथ नगर, शाहदरा में जाकर बसे और वहाँ पर पहली कक्षा से मेरी पढ़ाई शुरू हुई। भोलानाथ नगर आने का एक कारण यह भी था कि मेरे…