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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 26th Aug 2018

    115. सुविधा की होड़ और विद्रोही मुद्राएं!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- आज अपने ही एक गीत के बहाने बात कर लेता हूँ। शायद मैंने यह कविता पहले भी शेयर की हो, जब मैंने शुरू के अपने ब्लॉग, अपने जीवन के विभिन्न चरणों के बहाने, अपने बचपन से प्रारंभ करके लिखे थे, उस समय तो यहाँ ब्लॉग…

  • 25th Aug 2018

    256. WOW: 30 चीजें जिनसे मुझे वास्तव में खुशी मिलती है!

    बहुत अच्छा लगने वाला लेकिन काफी कठिन सवाल है! क्या है जो आपको बहुत अच्छा लगता है। ऐसा मुझसे सामान्यतः पूछा जाए, तो शायद मैं दो-तीन चीजें गिनाकर रुक जाऊंगा। लेकिन ऐसी 30 चीजें! बहुत मुश्किल है उस आंकड़े तक पहुंचना जी। चलिए आपके साथ मिलकर वहाँ तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। कुछ बातें…

  • 24th Aug 2018

    254.पंजिम: मांडवी नदी और मीरामार!

      पिछले दिनों मैंने देश-विदेश के कुछ स्थानों के भ्रमण पर आधारित ब्लॉग लिखे, जिनका प्रारंभ मैंने लंदन से किया था और इस बात को भी रेखांकित किया था कि लंदन के जीवन में थेम्स नदी की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका है! मैं पिछले एक वर्ष से अधिक समय से गोआ में, पंजिम के निकट रह…

  • 23rd Aug 2018

    114. वो कर रहा था मुरव्वत भी दिल्लगी की तरह!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- कुछ विषय ऐसे हैं, कि जब आपके पास बात करने के लिए कोई विषय न हो, तब आप इनको लेकर अपना स्वेटर या कहें कि आलेख बुन सकते हैं। जैसे एक विषय है मौसम, दूसरा है प्यार! वैसे प्यार कौन नहीं करता और किसका काम…

  • 22nd Aug 2018

    113. तानसेन

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- तानसेन से जुड़ा एक प्रसंग याद आ रहा है, जो कहीं सुना या पढ़ा था। अकबर के दरबार में तानसेन गाते थे और सभी मंत्रमुग्ध होकर सुनते थे। अकबर उनकी भरपूर तारीफ करते, कहते तानसेन आप कितना सुंदर गाते हो, एक दूसरी ही दुनिया में…

  • 21st Aug 2018

    112. बच्चा स्कूल जा रहा है!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- आज बिना किसी भूमिका के, निदा फाज़ली साहब की एक नज़्म शेयर कर रहा हूँ, यह नज़्म खुद इतना कहती है कि मैं उसके आगे क्या कह पाऊंगा! बच्चा जब स्कूल जाता है, शिक्षा प्राप्त करता है, अपने लिए और अपने समय के लिए, देश…

  • 19th Aug 2018

    253. शिक्षा में अशिक्षा!

    शिक्षा के बारे में बात करते हुए बड़े संकोच का अनुभव होता है। वैसे मेरे खयाल में देश में कुछ ऐसे शिक्षा मंत्री भी हुए हैं जो शायद बहुत अधिक पढ़े-लिखे नहीं थे, और यह भी संभव है कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने की दृष्टि से उनका योगदान अधिक हो। तो हम भी…

  • 18th Aug 2018

    252. ईश्वर से वार्तालाप!

    अब यह भी अजीब इत्तेफाक़ है कि मैंने अभी हाल ही में, अपनी एक पोस्ट में भगवान से बात होने का ज़िक्र किया था, लेकिन वो स्वप्न में था। अब मैं फोन पर भगवान से हुई बातचीत आपके साथ शेयर कर लेता हूँ! असल में, मैं उन लोगों में से हूँ जो फोन अपने पास…

  • 18th Aug 2018

    110. कभी रो के मुस्कुराये, कभी मुस्कुरा के रोये!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- हिंदी फिल्मों के कुछ ऐसे पुराने गीत हैं, जो आज की तारीख में भले ही बहुत ज्यादा सुनने को नहीं मिलते हों, लेकिन जब अचानक सुनने को मिल जाते हैं, तो सुनकर लगता है कि क्या शायर ने अपना दिल उंडेलकर रख दिया है और…

  • 17th Aug 2018

    251. लिखित शब्द की अंतिम सांसें!

    आज # IndiBlogger पर # IndiSpire के अंतर्गत उठाए गए विषय पर अपने विचार रख रहा हूँ, जिसमें यह चिंता व्यक्त की गई है कि ‘क्या वीडियो ब्लॉग, लिखित ब्लॉग्स को समाप्त कर देंगे’ अथवा ‘क्या टेलीविज़न ने प्रिंट मीडिया पत्रकारिता’ अथवा अखबार-पत्रिकाओं को समाप्त कर दिया है?’ कुछ बातें, कुछ प्रक्रियाएं सनातन हैं और…

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