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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Oct 2018

    130. बचपन

    आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- मेरी कुछ पुरानी कविताओं को शेयर करने के क्रम में, प्रस्तुत है आज की कविता- बचपन बचपन के बारे में, आपके मन में भी कुछ सपनीले खयालात होंगे, है भी ठीक, अपने आदर्श रूप में- बचपन एक सुनहरा सपना है, जो बीत जाने के बाद, बार-बार…

  • 27th Oct 2018

    129. मन के सुर राग में बंधें!

    आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- पुरानी कविताएं, जिनको मैंने उस समय फाइनल नहीं माना यानी ‘पास्ट इंपर्फेक्ट’ कविताओं में से, एक कविता आज प्रस्तुत है- मुझमें तुम गीत बन रहो मुझमें तुम गीत बन रहो, मन के सुर राग में बंधें। वासंती सारे सपने पर यथार्थ तेज धूप है, मन की…

  • 26th Oct 2018

    जब हम दोनो ज़ुदा हुए

    आज फिर से अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बॉयरन की एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- जब हम दोनो ज़ुदा हुए हम दोनो जब ज़ुदा हुए खामोशी और आंसुओं के बीच, टूटे हुए दिल के साथ, बरसों…

  • 25th Oct 2018

    128. पेड़!

    आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- किसी ज़माने में कविताएं लिखने का बहुत चाव था। उस समय जो कविताएं किसी हद तक ‘परफेक्ट’ लगती थीं उनको मित्रों के बीच, गोष्ठियों में पढ़ देता था। बहुत सी पांडुलिपियां ऐसी होती थीं जिनको लेकर तसल्ली नहीं होती थी। ऐसी ही कुछ कागज़ पर सुरक्षित…

  • 24th Oct 2018

    तेरी याद दिल से भुलाने चला हूँ!

    आज अपने प्रिय गायक मुकेश जी के गाये एक गीत का पहले अंग्रेजी रूपांतर प्रस्तुत करूंगा और बाद में मूल गीत प्रस्तुत करूंगा। यह गीत शैलेंद्र जी ने लिखा था और इसका संगीत दिया था – शंकर-जयकिशन कि विख्यात जोड़ी ने, फिल्म है- 1962 में रिलीज़ हुई- हरियाली और रास्ता। फिल्म के नायक थे- मनोज…

  • 23rd Oct 2018

    फ्लोरेंस और पीसा के बीच मार्ग पर लिखे गए कुछ छंद

    आज फिर से अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बॉयरन की एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- फ्लोरेंस और पीसा के बीच मार्ग पर लिखे गए कुछ छंद अरे,मुझसे किसी ऐसे नाम के बारे में बात न करो,जो…

  • 22nd Oct 2018

    126. कहती टूटी दीवट, सुन री उखड़ी देहरी!

    आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- आज एक खबर कहीं पढ़ी कि उत्तराखंड के किसी गांव में केवल बूढ़े लोग रह गए हैं, विशेष रूप से महिलाएं, जवान लोग रोज़गार के लिए शहरों को पलायन कर गए हैं। वैसे यह खबर नहीं, प्रक्रिया है, जो न जाने कब से चल रही है,…

  • 21st Oct 2018

    WOW: What If, It is festival season always?

    Now are the days of festivals, I think starting with Ganesh Puja- festivals, celebrations continue till the year-end, while the year-end, welcoming of the New Year is a big celebration in itself. There are old stories associated with each festival, some great soul, God himself, worshipping celebrating the old auspicious events, like the return of…

  • 20th Oct 2018

    Education and Literacy

    Again I am getting a chance to discuss about the Indian Education system, find faults with it and try to suggest some steps to improve it, while I do not consider myself educated enough to do all that! But the fact remains that we the Indians, might not be able to accomplish something, do some…

  • 19th Oct 2018

    संगीत के लिए कुछ छंद

    आज अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बॉयरन की एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- संगीत के लिए कुछ छंद ऐसी कोई नहीं होगी सौंदर्य-पुत्री, जिसका जादू तुम्हारी तरह मुग्ध करता हो, और तुम्हारा मधुर स्वर है मेरे…

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