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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Mar 2019

    कैसे फिर चैन तुझ बिन, तेरे बदनाम लेंगे!

    मेरे प्रिय गायक मुकेश जी के गाये, प्रेम के और नायिका सौंदर्य वर्णन के सुंदर गीतों के क्रम में आज भी मैं एक प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ, संभव है कि मैंने इस गीत को पहले भी उद्धृत किया हो। आज का गीत 1963 में रिलीज हुई फिल्म- ‘फूल बने अंगारे’ के लिए आनंद…

  • 16th Mar 2019

    Being Nostalgic Regarding Blogging!

    Today’s subject for discussion is based on being self obsessed or in self love. Everybody likes the way he behaves and deals with things. We all imbibe values, our understanding of right and wrong from our families, schools, colleges, neighborhood, friends etc. etc. Everybody considers that the things that he or group of similar people…

  • 16th Mar 2019

    BENEFITS OF DRINKING COFFEE AT BREAKFAST

    Today I am sharing a guest post on request, I hope my friends find it useful. What coffee for breakfast can do for me? There are many people who leave the house after drinking only a cup of coffee. This is a bad habit that negatively affects our health. Leaving the house in the morning…

  • 15th Mar 2019

    प्यार का ये महूरत निकल जाएगा !

    कल मैंने बताया कि मुझे अपने प्रिय गायक मुकेश जी के गाये, प्रेम के और नायिका सौंदर्य वर्णन के कई सुंदर गीत एक साथ याद आ रहे हैं। कोशिश करूंगा कि कुछ दिनों तक अपने प्रिय ऐसे कुछ गीत शेयर करूं। इस क्रम में आज 1965 में रिलीज हुई फिल्म- ‘नई उमर की नई फसल’…

  • 14th Mar 2019

    सो गई हैं सारी मंज़िलें, सो गया है रस्ता!

    आज मुझे अपने प्रिय गायक मुकेश जी के गाये, प्रेम के और नायिका सौंदर्य वर्णन के कई सुंदर गीत एक साथ याद आ रहे हैं। यह निर्णय नहीं कर पा रहा कि कौन सा गीत शेयर करूं! तो फिलहाल ऐसा करता हूँ, उनके सुपुत्र नितिन मुकेश जी का गाया एक बहुत सुंदर गीत शेयर कर…

  • 13th Mar 2019

    मैंने समुद्र में अपना जाल फेंका  

    आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि  गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 12th Mar 2019

    फटी हुई जेबों में करुणा!

    आज सुबह की घटना के बहाने बात करना चाहूंगा। सुबह के समय मैं अपनी सोसायटी के पीछे बने स्टोर से दैनिक सामान खरीदने जाता हूँ। जो वस्तुएं मैं सामान्यतः खरीदता हूँ उनमें दूध के पैकेट और फल के नाम पर कुछ केले मैं खरीदता हूँ, बाकी सब सामान के लिए घर में और लोग भी…

  • 11th Mar 2019

    गीतों के दाम की तरह!

    लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- आज असहिष्णुता के बारे में बात करने की इच्छा है। ये असहिष्णुता, उस असहिष्णुता की अवधारणा से कुछ अलग है, जिसको लेकर राजनैतिक दल चुनाव से पहले झण्डा उठाते रहे हैं, और अवार्ड वापसी जैसे उपक्रम होते रहे हैं। मुझे इसमें कतई कोई संदेह नहीं है कि समय…

  • 9th Mar 2019

    शीर्षक रहित!

     

  • 8th Mar 2019

    जो मिलता है, उसका दामन भीगा लगता है!

    आज क़ैसर उल जाफरी जी की लिखी एक गज़ल याद आ रही है, जिसके कुछ शेर पंकज उधास जी ने बड़ी खूबसूरती से गाए हैं। वास्तव में उदासी की, अभावों की और प्यार के अभाव की और लगभग दीवानगी की स्थिति को इस गज़ल के शेरों में बहुत प्रभावी अभिव्यक्ति दी गई है-   दीवारों…

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