Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 29th Dec 2025

    सबरस जी के दुमदार दोहे!

    आज मैंअपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से एक कवि श्री सबरस जी के कुछ ‘दुमदार दोहे’ जो मैंने बहुत पहले कवि सम्मेलन में सुने थे, (मुझे उनका पूरा नाम भी याद नहीं है) जैसे ये हास्य के दोहे मुझे याद हैं, मैं प्रस्तुत कर रहा हूँ, मेरा उद्देश्य केवल उनकी इस रचना को जनता तक…

  • 29th Dec 2025

    यही इंतिज़ार होता!

    ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता,अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता। मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 29th Dec 2025

    सात दिन हम पे भी !

    ता-क़यामत शब-ए-फ़ुर्क़त में गुज़र जाएगी उम्र,सात दिन हम पे भी भारी हैं सहर होने तक। मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 29th Dec 2025

    हमने कब मौसम का!

    आज फिर से मेरा एक पुराना गीत प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- हमने कब मौसम का वायलिन बजाया है।हम सदा जिए झुककर, सामने हवाओं के,उल्टे ऋतुचक्रों, आकाशी घटनाओं के,अपना यह हीनभाव, साथ सदा आया है। छंद जो मिला हमको, गाने कोघायल होंठों पर तैराने को,शापित अस्तित्व और घुन खाए सपने ले,मीन-मेख क्या करते-गाना…

  • 28th Dec 2025

    शम्अ हर रंग में!

    ग़म-ए-हस्ती का ‘असद‘ किस से हो जुज़ मर्ग इलाज शम्अ हर रंग में जलती है सहर होने तक। मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 28th Dec 2025

    ख़ाक हो जाएँगे हम!

    हम ने माना कि तग़ाफ़ुल न करोगे लेकिन,ख़ाक हो जाएँगे हम तुम को ख़बर होने तक। मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 28th Dec 2025

    आशिक़ी सब्र-तलब!

    आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब,दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होने तक। मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 28th Dec 2025

    आह को चाहिए इक!

    आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक,कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक। मिर्ज़ा ग़ालिब

  • 28th Dec 2025

    अशोक वाटिका प्रसंग

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में मुकेश जी द्वारा किए गए श्रीरामचरित मानस के पाठ में से सुंदर कांड में से अशोक वाटिका से संबंधित हनुमान जी की लीला का कुछ अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ। आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद्।

  • 28th Dec 2025

    जिसने नज़र उठाई!

    जिसने नज़र उठाई वही शख़्स गुम हुआ,इस जिस्म के तिलिस्म की बंदिश तो देखिए| दुष्यंत कुमार

←Previous Page
1 … 127 128 129 130 131 … 1,438
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,132 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar