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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Jun 2020

    क्या जाने किस भेष में बाबा!

      हमारे यहाँ बहुत पुरानी मान्यता है और उस मान्यता को मान्यता देते हुए, एक फिल्मी गीत भी था-   बड़े प्यार से मिलना सबसे, दुनिया में इंसान रे, क्या जाने किस भेष में बाबा, मिल जाए भगवान रे!   देखा जाए तो हमारे प्रधान मंत्री मोदी जी ने इस विचार को खूब प्रचारित किया…

  • 19th Jun 2020

    बंसी से बन्दूक बनाते, हम वो प्रेम पुजारी !

    कल मैंने बाल स्वरूप राही जी की एक गजल प्रस्तुत की थी, जिसमें ताजमहल का ज़िक्र आया था| तुरंत मुझे स्वर्गीय नीरज जी का एक गीत याद आ गया| यह गीत फिल्म- प्रेम पुजारी के लिए रफी साहब की आवाज़ और सचिन दा के संगीत निर्देशन में बहुत सुंदर ढंग से फिल्माया गया है| अभी…

  • 18th Jun 2020

    सपने ताजमहल के हैं!

    आज मैं हिन्दी बहुत प्यारे कवि/ गीतकार स्वर्गीय बाल स्वरूप राही जी की एक गजल प्रस्तुत कर रहा हूँ| राही जी ने बहुत अच्छे गीत और गज़लें हमें दी हैं| आज की ये गजल भी आशा है आपको पसंद आएगी-     उनके वादे कल के हैं, हम मेहमाँ दो पल के हैं ।  …

  • 17th Jun 2020

    हम उसी प्यास के समन्दर थे !

    आज मैं हिन्दी गीत कविता के एक प्रमुख हस्ताक्षर रहे स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| अवस्थी जी अत्यंत भावुक और सृजनशील कवि थे और उनको कवि सम्मेलनों में बहुत आदर के साथ सुना जाता था| अवस्थी जी का यह गीत भी एक अलग प्रकार के अनुभव को चित्रित करता…

  • 16th Jun 2020

    या गम न दिया होता, या दिल न दिया होता!

    आज फिर से बारी है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट की, लीजिए प्रस्तुत है- एक बार और दिल की बात कर लेते हैं, ऐसे ही कुछ बातें और आ रही हैं दिमाग में, आप इसे दिल पर मत लेना। कितनी तरह के दिल लिए घूमते हैं दुनिया में लोग, एक गीत में किसी ने बताया था-…

  • 15th Jun 2020

    आत्म-मुग्ध, आत्म-लिप्त, आत्म-विरत!

    मुझे ‘गर्म हवा’ फिल्म का प्रसंग याद आ रहा है| विभाजन के समय के वातावरण पर बनी थी वह फिल्म, जिसमें स्वर्गीय बलराज साहनी जी ने आगरा के एक मुस्लिम जूता व्यापारी की भूमिका बड़ी खूबसूरती से निभाई थी|     उस फिल्म में एक मुस्लिम नेता का चरित्र दिखाया गया है, जिसे तालियाँ बजवाने…

  • 14th Jun 2020

    One Change That I would like to make in the Human World!

    Today I would like to mention in the beginning that I am making my submission based on the following #IndiSpire prompt- Suppose you’re given the boon by god to change one thing in this human world. What will you change? #UltimateChange     I am selfish to some extent, and yes I think this is…

  • 13th Jun 2020

    प्रश्न किया है मेरे मन के मीत ने!

    आज मैं हिन्दी काव्य मंचों के ओजस्वी कवि स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी का एक अत्यंत प्रभावशाली गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| त्यागी जी जुझारूपन से भरे गीतों के लिए प्रसिद्ध रहे हैं, परंतु यह अत्यंत रूमानी और भावपूर्ण गीत है| लीजिए इस गीत का आनंद लीजिए-     प्रश्न किया है मेरे मन के मीत…

  • 12th Jun 2020

    मैना बोली हाऊ डू यू डू, तोता बोला व्याकुल हूँ!

    आज मैं हिन्दी हास्य कविता के एक अनूठे हस्ताक्षर स्वर्गीय ओम प्रकाश आदित्य जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| आदित्य जी निर्मल हास्य सृजित करने में माहिर थे| कभी उन्होंने छंद को नहीं छोड़ा और कभी किसी फूहड़ अभिव्यक्ति का सहारा नहीं लिया| मेरा सौभाग्य है कि मुझे कई बार उनको अपने आयोजनों…

  • 11th Jun 2020

    खोया हुआ समय- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

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