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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 23rd Jan 2021

    हम जहाँ हैं, वहीं से आगे बढ़ेंगे!

    हिन्दी के एक प्रतिष्ठित नवगीतकार हैं श्री ओम प्रभाकर जी, जिन्होंने अनेक प्रसिद्ध रचनाएँ दी हैं| आज उनकी जो रचना मैं शेयर कर रहा हूँ, वह मानव जीवन में निरंतर चल रहे संघर्ष को अभिव्यक्त करती है| एक संघर्ष तो व्यक्ति के जीवन में चलता है और एक पीढ़ी दर पीढ़ी भी चलता जाता है|…

  • 22nd Jan 2021

    मुक्त प्रेम- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। आज भी मैंने अनुवाद के लिए अंग्रेजी कविता को ऑनलाइन उपलब्ध कविताओं…

  • 21st Jan 2021

    लोगों का काम है कहना!

    फिल्म जगत के बहुत प्रसिद्ध और सफल गीतकार रहे हैं आनंद बख्शी साहब| उन्होंने बहुत बड़ी संख्या में गीत लिखे हैं, जिनमें कुछ बहुत हल्के-फुल्के भी थे और कुछ गीत बहुत शानदार थे| आज मैं आनंद बख्शी साहब का यह गीत शेयर कर रहा हूँ जो बहुत सुंदर और भावपूर्ण है, यह गीत फिल्म- अमर…

  • 20th Jan 2021

    जिस्म से रूह तलक रेत ही रेत!

    आज कैफ़ी आज़मी साहब की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| कैफ़ी साहब एक क्रांतिकारी शायर थे, वे मुशायरों की शान हुआ करते थे और फिल्मों के लिए भी उन्होंने अनेक यादगार गीत लिखे हैं| लीजिए प्रस्तुत है कैफ़ी साहब की यह रचना – रोज़ बढ़ता हूँ जहाँ से आगेफिर वहीं लौट के आ जाता…

  • 19th Jan 2021

    अरे, लखिय बाबुल मोरे!

    अमीर खुसरो जी की एक रचना आज शेयर कर रहा हूँ| खुसरो जी एक सूफी, आध्यात्मिक कवि थे, और ऐसा भी माना जाता है की खड़ी बोली में कविता का प्रारंभ उनसे ही हुआ था| उनका जन्म 1253 ईस्वी में पटियाली में हुआ था और देहांत 1325 ईस्वी में दिल्ली में हुआ| लीजिए प्रस्तुत है…

  • 18th Jan 2021

    सुन ले खेतों के राजा, घर की रानी !

    आज फिर से मैं हिन्दी काव्य मंचों के एक प्रमुख हस्ताक्षर रहे स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| इस रचना में अवस्थी जी ने यही व्यक्त किया है कि हमारी व्यक्तिगत आस्थाएँ, आकांक्षाएँ और धार्मिक रुझान कुछ भी हों, हमारे लिए सबसे पहले देश का स्थान है| लीजिए प्रस्तुत है…

  • 17th Jan 2021

    अभागों की टोली अगर गा उठेगी!

    स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक रचना आज शेयर कर रहा हूँ| भवानी दादा बातचीत के लहजे में कविता कहने के लिए प्रसिद्ध थे| उन्होंने अनेक बहुमूल्य काव्य संकलन हमें दिए हैं, जिनमें ‘बुनी हुई रस्सी’, ‘गीत फ़रोश’, ‘खुशबू के शिलालेख’, ‘त्रिकाल संध्या’ आदि शामिल हैं और उनके संकलन- ‘बुनी हुई रस्सी’ के लिए…

  • 16th Jan 2021

    सूर्यास्त : एक इंप्रेशन

    आज एक बार फिर से मैं स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| दुष्यंत कुमार जी को आपातकाल में लिखी गई उनकी गज़लों के कारण विशेष रूप से प्रसिद्धि मिली थी, जिनको उनके संकलन ‘साये में धूप’ में शामिल किया गया था और मैंने उनकी कुछ गज़लें पहले शेयर भी की…

  • 15th Jan 2021

    चाय-सी ठंडी हँसी, आँखें तराजू!

    एक बार फिर से मैं अपने एक प्रिय कवि और नवगीत विधा के प्रमुख हस्ताक्षर स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| रंजक जी ने हर प्रकार के गीत लिखे हैं और वे जुझारूपन और बेबाकी के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं| लीजिए प्रस्तुत है रंजक जी का यह…

  • 14th Jan 2021

    नए तीर हैं, निशाने ढूँढते हैं !

    प्रसिद्ध शायर अहमद फ़राज़ साहब की एक गजल आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| फ़राज़ साहब भारतीय उपमहाद्वीप के बहुत मशहूर शायर हैं, वैसे विभाजन के बाद वे पाकिस्तान में रहते थे | शायरी की दुनिया में फ़राज़ साहब बहुत मशहूर हैं और उनकी अनेक गज़लें जगजीत सिंह जी और गुलाम अली जी ने भी गायी…

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