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ये बर्फ आंच के आगे पिघल न जाए कहीं!
दुष्यंत कुमार जी की आपातकाल में लिखी गई कुछ ग़ज़ल और कविताएं मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| आज दुष्यंत जी की एक और ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ, जो उनके संकलन ‘साये में धूप’ में शामिल थी| लीजिए प्रस्तुत है यह ग़ज़ल- नज़र-नवाज़ नज़ारा बदल न जाए कहीं,जरा-सी बात है मुँह से निकल…
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ओ प्रवासी जल!
डॉ कुँवर बेचैन मेरे गुरुजनों में रहे हैं| मैं उस कालेज में विज्ञान के विद्यार्थी के रूप में कुछ समय गया जिसमें वे हिन्दी साहित्य पढ़ाते थे| खैर उनसे परिचय तो बाद में कवि गोष्ठियों के माध्यम से हुआ और बाद में कुछ बार मैंने एक आयोजक की भूमिका निभाते हुए भी उनको कवि के…
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घुँघरू टूट गए!
ज़नाब क़तील शिफाई जी भारतीय उप महाद्वीप के एक मशहूर शायर रहे हैं, कवि-कलाकार देशों की सीमाओं में नहीं बंधे होते| क़तील साहब की अनेक गज़लें जगजीत सिंह जी और अन्य गायकों ने गाई हैं| आज उनकी एक अलग किस्म की रचना शेयर कर रहा हूँ| एक ऐसा गीत जो वास्तव में मन के मुक्त…
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भाग न बाँचे कोय!
आज फिर से मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| आज का ये गीत, शैलेंद्र जी ने उनके द्वारा ही निर्मित फिल्म- ‘तीसरी कसम’ के लिए ही लिखा था और शंकर जयकिशन जी के संगीत निर्देशन में इसे मुकेश जी ने अपने लाजवाब अंदाज़ में गाया है|…
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तेरा नाम ही लेना छोड़ दिया!
आज फिर से मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| आज का ये शानदार गीत 1965 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘सहेली’ से है, जिसे लिखा है – इंदीवर जी ने और कल्याणजी आनंद जी के संगीत निर्देशन में इसे मुकेश जी ने अपने लाजवाब अंदाज़ में गाया…
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बोल बोल आरंबोल!
आज मैं गोवा की एक बेहद खूबसूरत बीच – ‘आरंबोल’ के बारे में बात करूंगा| पिछले कई वर्षों से गोवा के पंजिम नगर में रह रहा हूँ, और इसके बारे में भी हमेशा दुविधा में रहता हूँ कि इसे ‘पणजी’ कहूँ या ‘पंजिम’ कहूँ, क्योंकि ये दोनों नाम ही लिखे मिल जाते हैं| हाँ तो…
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यूं उठे आह उस गली से हम!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- एक किस्सा याद आ रहा है, एक सज्जन थे, नशे के शौकीन थे, रात में सोते समय भी सिगरेट में नशा मिलाकर पीते थे, एक बार सुट्टे मारते-मारते सो गए, और बाद में अचानक उन्हें धुआं सा महसूस हुआ, कुछ देर तो सोचते रहे कि…
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सागर किनारे – अज्ञेय
आज हिन्दी साहित्य के एक विराट व्यक्तित्व – सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| अज्ञेय जी ने वैसे तो साहित्य की हर विधा में अपनी छाप छोड़ी है परंतु हिन्दी कविता को नया स्वरूप प्रदान करने वालों में उनकी प्रमुख भूमिका थी| लीजिए प्रस्तुत है अज्ञेय जी की एक…
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मुझे पूर्णतः प्रसन्न रखिए – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। आज भी मैंने अनुवाद के लिए अंग्रेजी कविता को ऑनलाइन उपलब्ध कविताओं…