-
कोई पार नदी के गाता!
हिन्दी कवि सम्मेलनों के मंचों पर किसी समय हरिवंशराय बच्चन जी का ऐसा नाम था, जिसके लोग दीवाने हुआ करते थे| वह उनकी मधुशाला हो या लोकगीत शैली में लिखा गया उनका गीत- ‘ए री महुआ के नीचे मोती झरें’, ‘अग्निपथ,अग्निपथ,अग्निपथ’ आदि-आदि| एक बात माननी पड़ेगी मुझे उनको कवि-सम्मेलन में साक्षात सुनने का सौभाग्य नहीं…
-
मैं नहीं कोई तो साहिल पे उतर जाएगा!
आज एक बार फिर मैं भारतीय उपमहाद्वीप में शायरी के क्षेत्र की एक महान शख्सियत रहे ज़नाब अहमद फ़राज़ साहब की एक प्रसिद्ध ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| फराज़ साहब भारत में बहुत लोकप्रिय रहे हैं और अनेक प्रमुख ग़ज़ल गायकों ने उनके गीत-ग़ज़लों आदि को गाया है| लीजिए प्रस्तुत है ये खूबसूरत ग़ज़ल- आँख…
-
दो पल के जीवन से, एक उम्र चुरानी है!
आज ‘इंडियन आइडल’ के एक ताज़ा एपिसोड को देखने के अनुभव को शेयर करना चाहूँगा| इस प्रोग्राम में अनेक युवा प्रतिभाएँ आती हैं, युवक-युवतियाँ हो गायन के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा के बल पर कुछ पाना चाहते हैं| इस प्रोग्राम में कुछ प्रतिष्ठित गायक, संगीतकार आदि निर्णायकों के रूप में और संगीत के क्षेत्र की…
-
इतना मधुर कैसे गाते हो तुम – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। आज भी मैंने अनुवाद के लिए अंग्रेजी कविता को ऑनलाइन उपलब्ध कविताओं…
-
देती है खुशी कई गम भी!
सप्ताहांत में लोग आराम के मूड में रहते हैं, ऐसे में मस्तिष्क पर ज्यादा बोझ नहीं डालना चाहिए| मैं देखता हूँ कि शनिवार-रविवार को पोस्ट करने वालों और पोस्ट पढ़ने वालों की संख्या भी कम होती है| खैर आज मैं 1964 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘कोहरा’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| क़ैफी आज़मी…
-
मासूमियत के नए प्रतिमान!
मेरे घर में आजकल काक्रोच की समस्या काफी गंभीर है| कुछ समझ में नहीं आ रहा कि इनसे कैसे छुटकारा पाया जाए| कई बार जब हम इनको मारने के लिए स्प्रे करने लगते हैं तो पाते हैं कि बहुत छोटे-छोटे मासूम से काक्रोच सामने आते हैं। जो भी हो छोटा बच्चा अच्छा लगता है, इन…
-
टूटी आवाज़ तो नहीं हूँ मैं!
आज फिर से पुरानी पोस्ट का दिन है, लीजिए मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट, फिर से शेयर कर रहा हूँ| निदा फाज़ली साहब की एक गज़ल है- तन्हा तन्हा दुख झेलेंगे महफ़िल महफ़िल गाएँगेजब तक आँसू पास रहेंगे तब तक गीत सुनाएँगे। यह गज़ल पहले भी शायद मैंने शेयर की है, आज इस गज़ल का…
-
न जाने किस गली में, ज़िंदगी की शाम हो जाए!
आधुनिक उर्दू शायरी के प्रमुख हस्ताक्षर डॉ बशीर बद्र जी की एक ग़ज़ल आज शेयर कर रहा हूँ| डॉ बद्र शायरी में नया मुहावरा गढ़ने और प्रयोग करने के लिए जाने जाते हैं| इस ग़ज़ल की विशेष बात ये है कि इसका अंतिम शेर जैसे एक मुहावरा बन गया, लोग अक्सर इसका प्रयोग करते हैं,…
-
कितने दाग लगे चादर में!
एक समय था जब दिल्ली में रहते हुए कवि सम्मेलनों, कवि गोष्ठियों आदि के माध्यम से अनेक श्रेष्ठ कवियों को सुनने का मौका मिलता है| अब वैसा माहौल नहीं रहा, एक तो ‘कोरोना’ ने भी बहुत कुछ बदल दिया है| हाँ तो पुराने समय के काव्य-मंचों पर उभरने वाले बहुत से कवि, जिनकी कविताएं मैं…
-
Global Anti-India Band!
Talking about present situations in our country is not easy. It is perhaps happening all over the world, like in America, after defeat of Trump in elections, in Myanmar recently through Military coup etc. but I would focus on the situation in India only. In India the farmers’ movement is the biggest news for last…