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अक्कड़ मक्कड़, धूल में धक्कड़!
स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी बातचीत के लहजे में कविता लिखने के लिए प्रसिद्ध थे| उनके एक संकलन का नाम था ‘बुनी हुई रस्सी’, जिसका आशय है की वे कविता में रस्सी जैसी बुनावट की अपेक्षा रकहते थे| अपने मुंबई जाने के अनुभव को लेकर उन्होंने एक रचना लिखी थी- ‘जी हाँ हुज़ूर, मैं गीत…
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मेरा सूना पड़ा रे संगीत !
मेरे प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत आज शेयर कर रहा हूँ| आज का ये 1957 में रिलीज़ हुई फिल्म- रानी रूपमती के लिए पंडित भरत व्यास जी ने लिखा था और एस एन त्रिपाठी जी के संगीत निर्देशन में मुकेश जी ने इसे बड़े मनमोहक अंदाज़ में गाया है| लीजिए प्रस्तुत…
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प्यार से भीगा प्रकृति का गात साथी!
स्वर्गीय भारत भूषण जी मेरे परम प्रिय कवि रहे हैं, कवि सम्मेलनों में उनका कविता पाठ सुनना, वास्तव में वहाँ जाने की क्रिया को सार्थक कर देता था| बहुत भाव-विभोर होकर वे सस्वर काव्य-पाठ करते थे| आज का भारत भूषण जी का यह गीत दर्शाता है कि किस प्रकार पूरे संयम और मर्यादा के साथ,…
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शाम आई-याद आई!
लीजिए आज फिर से प्रस्तुत है, एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- कविताओं और फिल्मी गीतों में शाम को अक्सर यादों से जोड़ा जाता है। यह खयाल आता है कि ऐसा क्या है, जिसके कारण शाम यादों से जुड़ जाती है! यहाँ दो गीत याद आते हैं जो शाम और यादों का संबंध दर्शाते हैं। एक गीत…
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एहसास का मारा दिल ही तो है!
लीजिए आज फिर से प्रस्तुत है एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- कल एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर की थी| एक ही विषय पर लिखी ब्लॉग पोस्ट्स में से वह दूसरी थी| सोचता हूँ कि इस विषय पर साथ की अन्य पोस्ट भी शेयर कर लूँ| आज प्रस्तुत है उससे पहले लिखी गई पोस्ट| अगर यह…
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आखिर टूट जाता है!
आज फिर से दिन है पुरानी पोस्ट का, लीजिए प्रस्तुत है एक पुरानी पोस्ट- आज फिर दिल की बात होनी है, वैसे तो मैं समझता हूँ कि हर दिन इसी विषय पर बात की जा सकती है। एक गीत का मुखड़ा याद आ रहा है, ‘फिर वही दिल लाया हूँ’, जिस अंदाज़ में इसे रफी…
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मेरा बदन हो गया पत्थर का!
स्वर्गीय रमेश रंजक जी मेरे प्रिय कवि रहे हैं, उनका स्नेह भी मिला मुझे और एक विशेषता थी उनमें कि यदि अच्छी रचना उनके शत्रु की भी हो तो उसकी तारीफ़ अवश्य करते थे| कम शब्दों में कैसे बड़ी बात कही जाए, यह उनकी रचनाओं में देखा जा सकता है| आज मैं रंजक जी का…
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कच्चे रंगों से तसवीर बना डाली!
स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी के हिन्दी कविता के एक प्रमुख हस्ताक्षर रहे हैं| वे बच्चों की पत्रिका पराग के संपादक भी रहे थे और अपने साहित्य सृजन के लिए अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किए गए| आज मैं नंदन जी की यह रचना शेयर कर रहा हूँ- रेशमी कंगूरों परनर्म धूप सोयी।मौसम नेनस-नस मेंनागफनी बोयी!दोषों के…
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मौत मुसाफ़िरखाना है!
एक विषय दिया गया है, #IndiSpire के मंच पर, The end is often the beginning #Life वहाँ पर प्रविष्टि सामान्यतः अंग्रेजी में दी जाती है, परंतु मुझे लगा कि इस विषय पर लिखते हुए भारतीय दर्शन की जो बातें मेरे मन में आ सकती हैं, वे सभी हिन्दी में हैं और मैं हिन्दी और अंग्रेजी…
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चोट खाते रहे गुनगुनाते रहे!
स्वर्गीय डॉ राही मासूम रज़ा साहब हिन्दी-उर्दू साहित्य के एक प्रमुख रचनाकार रहे हैं| वे कविता, शायरी और उपन्यास लेखन, सभी क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय थे और पाठकों, श्रोताओं के चहेते रहे हैं| उनको अनेक साहित्यिक और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए थे| आज मैं डॉ राही मासूम रज़ा साहब की यह प्रसिद्ध गजल…